पावर कारपोरेशन के अफसरों ने बिजली चोरी के खिलाफ अभियान की नाकामी छुपाने के लिए लाखों उपभोक्ताओं की जेब काटने से पहले उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका तक नहीं दिया। विभाग को इतनी हड़बड़ी थी कि राज्य विद्युत नियामक आयोग से बगैर मीटर वाले घरेलू एवं वाणिज्यिक श्रेणी उपभोक्ताओं के बिल में दोगुने से ज्यादा बढ़ोतरी करने से पहले राज्य विद्युत नियामक आयोग के संज्ञान में तो नहीं ही लाया गया उपभोक्ताओं को भी इसकी सूचना नहीं दी गई।
बढ़ी दरें तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गईं ताकि मार्च तक घाटे की भरपाई की जा सके। पावर कारपोरेशन ने जुलाई और अगस्त माह में बिजली कनेक्शन देने का विशेष अभियान चलाया। इस अभियान के दौरान पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के 22 जिलों में 10 लाख से ज्यादा नए उपभोक्ता बनाए गए। विभागीय सूत्रों के मुताबिक इनमें से 95 फीसदी उपभोक्ताओं के यहां मीटर लगाए ही नहीं गए हैं।
अकेले पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में घरेलू और व्यावसायिक श्रेणी के लाइट, फैन एंड पावर के 23 लाख से ज्यादा उपभोक्ता ऐसे हैं, जिनके घरों में मीटर नहीं लगे हैं। प्रदेश भर में तो ऐसे लोगों का आंकड़ा 50 लाख से भी ज्यादा है। पूर्वांचल निगम के आंकड़ों को मुताबिक अनमीटर्ड उपभोक्ताओं से पिछले साल दिसंबर माह में 80 यूनिट प्रति किलोवाट प्रतिमाह की दर से वसूली की गई जबकि मीटर वालों ने औसतन 82 यूनिट बिजली खर्च की।
ऐसे में नार्मेटिव चार्ज दो गुना करने का कोई औचित्य नहीं है। मगर मुख्य सचिव आलोक रंजन के निर्देश पर दिसंबर माह में सूबे में बिजली चोरी रोको महाभियान के फ्लाप होने की नाकामी को छुपाने के लिए अनमीटर्ड उपभोक्ताओं से दोगुनी वसूली की योजना बना ली। इसमें कम आय वाले उपभोक्ता बुरी तरह मारे गए हैं।