बनारस में सेवई मंडी में एक-दूसरे से सटे पचास से अधिक घरों में सेवई-फेनी का कारखाना चलता है। स्थानीय लोगों के मुताबिक रमजान आते ही ये कारखाने अवैध एलपीजी सिलेंडरों का गोदाम बन जाते हैं।
दिन-रात काम चलते रहने के नाते सिलेंडरों का पर्याप्त भंडारण किया जाता है लेकिन न कोई मानक न सुरक्षा का ख्याल। पुलिस-प्रशासन से लेकर आपूर्ति विभाग और नगर निगम तक सबके संज्ञान में यह मामला होने के बावजूद कभी जन सुरक्षा या मानकों के अनुपालन के लिहाज से कोई कार्रवाई नहीं की जाती।
पितरकुंडा में डेढ़ साल पहले अवैध पटाखा बनाने के दौरान भीषण धमाका हुआ था। उसमें कई लोगों की मौत हो गई थी। उसके बावजूद घनी आबादी के बीच मनमाने तरीके से चलाए जा रहे विभिन्न तरह के कारखानों पर प्रशासन कोई अंकुश नहीं लगा पाया।
स्थानीय लोगों के मुताबिक सेवई मंडी में अवैध एलपीजी सिलेंडरों की खेप रोजाना पहुंचती है लेकिन कोई रोकटोक करने वाला नहीं होता। रमजान का महीना होने के नाते इन दिनों सेवई और फेनी बनाने का काम जोरों पर चल रहा था। जिस वक्त आग धधकी, उस समय भी कारखाने में काम चल रहा था।