आई फ्लू का संक्रमण होने पर आंख में तेज दर्द, लालिमा होना, पानी के साथ चिपचिपा पीला पदार्थ आना, खुजली होना, धुंधला दिखाई देना, जलन होना, देखने में परेशानी होना, आंखों का चिपकना और आंख में कुछ चले जाने जैसा महसूस होता है।
वाराणसी में आंखों का संक्रमण कंजक्टिवाइटिस (आई फ्लू) के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। स्वास्थ्य केंद्रों पर हर दिन आंखों में लालीपन,चुभनऔर खुजली की समस्या लिए लोग पहुंच रहे हैं। हरहुआ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर दो तीन दिनों से हर दिन 35 से 40 मरीज आई फ्लू के पहुंच रहे हैं।
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स्वास्थ्य विभाग ने सतर्क रहने के लिए कहा है साथ ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा उपाय बता जा रहे हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संदीप चौधरी स्वास्थ्य अधिकारियों को सतर्क रहने को कहा है। साथ ही सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं जिला स्तरीय अस्पतालों में आई फ्लू से संबंधित आई ड्रॉप की उपलब्धता सुनिश्चित कराने को कहा है।
क्या है वजह
आंखों का इंफेक्शन आमतौर पर एक आंख से शुरू होता है और दूसरी आंख में फैल जाता है। बारिश की वजह से हवा द्वारा संक्रमण फैलाने वाले कीटाणु और जीवाणु बढ़ जाते हैं। आई फ्लू एक संक्रामक बीमारी है और यह संक्रमित सतह को छूकर ही फैलता है। इसलिए अगर आप किसी सतह को छूती हैं तो आंखों को छूने से पहले हाथों को अच्छी तरह साफ करें और बार-बार आंखों को छूने से बचें।
आई फ्लू का संक्रमण होने पर आंख में तेज दर्द, लालिमा होना, पानी के साथ चिपचिपा पीला पदार्थ आना, खुजली होना, धुंधला दिखाई देना, जलन होना, देखने में परेशानी होना, आंखों का चिपकना और आंख में कुछ चले जाने जैसा महसूस होता है।
ये हैं बचाव के तरीके
आंखों को कई बार साफ एवं ठंडे पानी से धोएं और डॉक्टर द्वारा बताई आई ड्रॉप डालें। नियमित रूप से हाथों को धोएं, बिना हाथ धोए आंखें न छुएं, आंखों को मलने से बचें और जिन लोगों को आई फ्लू हो गया है, उनके संपर्क से दूर रहें।
अपना तौलिया, कपड़े, चादर, चश्मे, आई मेकअप के सामान, आई ड्रॉप को अलग रखें और इनको किसी से साझा न करें। बार-बार पलकें झपकने की आदत डालें। आंखों को कभी भी रगड़े नहीं, खुजली होने पर साफ पानी से छींटे मारकर साफ करें।