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विस्फोटक पदार्थ से नहीं हुआ था धमाका

Tue, 10 May 2016 01:43 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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बीएचयू अस्पताल
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बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में शनिवार दोपहर हुए धमाके में किसी विस्फोटक पदार्थ का इस्तेमाल नहीं हुआ था। फोरेंसिक जांच रिपोर्ट आने के बाद एसएसपी आकाश कुलहरि ने कहा कि अब यह तय है कि धमाके के पीछे कोई साजिश नहीं है। मामले की तह तक जाने के लिए संयुक्त तकनीकी समिति का गठन कर जांच कराई जाएगी ताकि पता चल सके कि आखिर ब्लास्ट की वजह क्या थी। सोमवार देर शाम एसएसपी ने जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेज दी। इस बीच बीएचयू की उच्चस्तरीय कमेटी ने भी ब्लास्ट की वजहों की पड़ताल शुरू कर दी है। जांच कमेटी के चेयरमैन व बिहार के पूर्व एडीजी डॉ. एके सेठ ने घटनास्थल का जायजा लिया और धमाके के वक्त वहां मौजूद रहे अस्पताल के कर्मचारियों का बयान लिया। बता दें कि ब्लास्ट में 27 लोग जख्मी हुए थे। इनमें से पांच का अब भी बीएचयू अस्पताल मेें उपचार चल रहा है कि जबकि शेष 22 को छुट्टी दे दी गई है।
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ब्लास्ट को लेकर पुलिस और बीएचयू प्रशासन अपने-अपने स्तर पर जांच करा रहा है मगर दोनों की जांच की थ्योरी जुदा है। बीएचयू का मानना है कि यह साधारण ब्लास्ट नहीं है। इसके पीछे बीएचयू को दहलाने की साजिश थी वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह एक हादसा है। घटनास्थल से अब तक ऐसे कोई सुराग नहीं मिले हैं, जो किसी साजिश की ओर इशारा करें। फोरेंसिक जांच रिपोर्ट में भी बताया गया है घटनास्थल से जांच के लिए जो नमूने लिए गए थे, उसमें किसी भी प्रकार के विस्फोटक का अंश नहीं मिला है। इसके साथ ही स्थानीय अभिसूचना इकाई (एलआईयू) ने भी अपनी जांच रिपोर्ट सोमवार को जिला प्रशासन को सौंप दी। एलआईयू की जांच रिपोर्ट में भी धमाके की वजह विस्फोटक पदार्थ को नहीं बताया गया है।

राष्ट्रपति के आगमन से पूर्व बीएचयू अस्पताल की इमरजेंसी में हुए ब्लास्ट की घटना को लेकर पुलिस और प्रशासनिक अमला बेहद संजीदा है। तेजी से बदलते घटनाक्रम के बीच सोमवार देर रात एसएसपी आकाश कुलहरि ने लंका थानाध्यक्ष को एसी कंपनी के इंजीनियर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
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एसएसपी ने बताया कि जानकारी में आया है कि ब्लास्ट के बाद दूसरे दिन वहां एसी लगाने वाली कंपनी के इंजीनियर पहुंचे। इंजीनियर ने मामले की गंभीरता को बिना समझे हुए ही कहा कि एसी से इतना बड़ा धमाका हो नहीं सकता है। इसके पीछे साजिश हो सकती है, जबकि फोरेंसिक जांच में तस्वीर साफ हो गई है। शांति और कानून व्यवस्था से जुड़े गंभीर मसलों पर इस तरह के सार्वजनिक बयान देकर आमजन में भय का माहौल पैदा करने की कोशिश किसी को नहीं करनी चाहिए। ऐसा करना अपराध की श्रेणी में आता है, इसीलिए कार्रवाई की जाएगी।
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