Varanasi News: काशीखंड के अनुसार भगवान शिव जब काशी आए तो वह प्रथम ऐसे पिता थे जिन्होंने अपने पुत्र ढुंढिराज गणेश की आराधना की थी। ढुंढिराज ने दिवोदास से जीतकर काशी उन्हें प्रदान की थी। नारायण ने भगवान शिव को काशी आने का संदेश भेजा था। इसलिए विश्वनाथ मंदिर में अनादिकाल से सबसे पहले ढुंढिराज गणेश और भगवान विष्णु के पूजन की सर्वप्रथम पूजा हो रही है।
वाराणसी में गर्मी के तेवर से इंसान ही नहीं मंदिरों के सेवादार भी परेशान हैं। यही कारण है कि शहर के मंदिरों में संध्या आरती के समय को आधे घंटे के लिए बढ़ा दिया गया है। केदारखंड, विश्वेश्वरखंड और ओंकारखंड के मंदिरों में शाम की आरती अब आधे घंटे की देरी से हो रही है। वहीं गंगा के तट पर होने वाली आरती का समय तो एकघंटे आगे बढ़ा दिया गया है।
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काशी में काशीवासियों के दिन की शुरुआत बाबा विश्वनाथ की मंगला आरती से होती है। बाबा की मंगला आरती से पहले ढुंढिराज गणेश और भगवान विष्णु की पूजा होती है। इसके बाद शहर के सभी मंदिरों आरती और पूजन की शुरुआत होती है। शाम को होने वाली आरती का समय सूर्यास्त से निर्धारित होता है।
जाड़े में अमूमन आरती का समय गंगा घाट पर होने वाली आरती का समय शाम 5:30 बजे से छह के बीच होता है। वहीं, गर्मियों में गंगा आरती शाम को सात बजे होती है। काशी के कोतवाल बाबा कालभैरव की संध्या आरती पहले 7:30 बजे हो रही थी अब गर्मियों में इसका समय आठ बजे हो गया है।
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दुर्गाकुंड क्षेत्र में सबसे पहले शाम को दुर्ग विनायक की आरती उतारी जाती है। आरती का समय शाम को 6:30 बजे निर्धारित है जो अब सात बजे हो गया है। दुर्गाकुंड मंदिर की आरती का समय 7:30 बजे था जो अब आठ बजे हो रही है। बनकटी हनुमान जी के मंदिर में आरती का समय सात बजे के बजाय अब 7:30 बजे हो गया है।
दुर्ग विनायक मंदिर के महंत पं. तारकेश्वर दुबे ने बताया कि दुर्गाकुंड क्षेत्र के सभी छोटे बड़े मंदिरों में रात नौ बजे एक साथ भोग लगाया जाता है। इसके अलावा त्रिलोचन महादेव, काशी करवत, उपशांतेश्वर, मंगला गौरी, कृतिवासेश्वर और महामृत्युंजय मंदिर में भी त्रिकाल संध्या के समय को 30 मिनट आगे बढ़ाया गया है।