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यह है हाल: तीन साल बीते... अब भी बनारस और वाराणसी में कन्फ्यूजन, रोज 20 यात्रियों की छूटती हैं ट्रेनें

Mon, 15 Jul 2024 08:52 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी

सार

Varanasi News: बनारस और वाराणसी स्टेशन को लेकर यात्रियों का कन्फ्यूजन ऑटो-रिक्शा चालक दूर करते हैं। इसे लेकर कभी-कभार किचकिच भी हो जाती है। बनारस स्टेशन कहकर यात्री ऑटो में बैठ जाते हैं जबकि उन्हें जाना होता है वाराणसी स्टेशन।
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बनारस और वाराणसी स्टेशन को लेकर कन्फ्यूजन। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आज बनारस स्टेशन के नामकरण को तीन साल हो गए। 15 जुलाई 2021 को मंडुवाडीह स्टेशन का नाम बदलकर बनारस किया गया था। साथ ही इसका कोड बीएसबीएस हुआ था। इन तीन सालों में स्टेशन पर एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं विकसित की गईं, लेकिन यात्रियों में अब भी बनारस और वाराणसी को लेकर भ्रम की स्थिति है। रेलवे अधिकारियों के रोजाना लगभग 15 से 20 यात्रियों की ट्रेनें छूटती हैं।

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शहर में चार प्रमुख रेलवे स्टेशन हैं। उत्तर रेलवे का वाराणसी कैंट और काशी जबकि पूर्वोत्तर रेलवे का बनारस और वाराणसी सिटी स्टेशन है। काशी, वाराणसी, बनारस और वाराणसी सिटी में लगभग समानता है। इसके चलते पर्यटकों को भ्रम हो जाता है। वह समझ नहीं पाते कि उन्हें किस जगह उतरना और चढ़ना है। 

नई दिल्ली रूट पर चलने वाली वाली शिवगंगा, बनारस-नई दिल्ली, काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस और झांसी रूट पर चलने वाली बुंदेलखंड एक्सप्रेस समेत अन्य रूट की ट्रेनों के यात्रियों का अंतिम ठहराव बनारस स्टेशन होता है। 
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बनारस स्टेशन से होकर कैंट जाने वाली ट्रेनों में अक्सर यह दिक्कत होती है कि यात्री बनारस स्टेशन का बोर्ड देखकर यहीं उतर जाते हैं। ठीक इसी तरह ट्रेन पकड़ने के लिए वह वाराणसी कैंट स्टेशन पहुंच जाते हैं। तब उन्हें पता चलता है कि बनारस स्टेशन दूसरा है। जब तक वह पहुंचते हैं, तब तक ट्रेन प्लेटफाॅर्म से छूट चुकी होती है।

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सबसे ज्यादा दक्षिण भारतीयों की छूटती हैं ट्रेनें
बनारस स्टेशन के आरपीएफ और जीआरपी के अलावा कॉमर्शियल विभाग के अनुसार बनारस नामकरण के तीन साल बाद भी बाहरी यात्रियों की ट्रेनें छूट रही हैं। इनमें सबसे ज्यादा दक्षिण भारतीय हैं।

लंबे संघर्ष के बाद बदला नाम
बनारस स्टेशन का नाम हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत के साथ उर्दू में भी लिखा है। कई सामाजिक संस्थाओं के लंबे संघर्ष के बदौलत ही बनारस स्टेशन का नाम पड़ा। तर्क था कि मंडुवाडीह नाम शहर को नहीं दर्शाता है। वरिष्ठ पत्रकार एके लारी ने रेलवे बोर्ड और तत्कालीन रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा समेत अन्य को पत्र लिखा था।

मॉडल स्टेशन का मिल चुका है खिताब
वाराणसी-प्रयागराज रेलखंड के बनारस स्टेशन को माॅडल स्टेशन का भी खिताब मिल चुका है। 2014 के बाद स्टेशन पर तीन से बढ़कर आठ प्लेटफाॅर्म हो गए हैं। इसके अलावा द्वितीय प्रवेश द्वार बन चुका है और लगातार विकास कार्य जारी हैं।

बोले अधिकारी
ट्रेनों में रनिंग कर्मियों के जरिये यात्रियों को जागरूक किया जाता है कि भ्रम न रहे। बनारस और वाराणसी स्टेशन के अंतर को समझें। - अशोक कुमार, जनसंपर्क अधिकारी, पूर्वोत्तर रेलवे वाराणसी मंडल
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