मंडलायुक्त ने कहा कि विश्वविद्यालय में पठन-पाठन को उच्चस्तरीय बनाया जा सकता है। इस दिशा में काम चल रहा है। एकेडमिक, टीचिंग, नान टीचिंग स्टाफ मिलकर ही इसे उच्चस्तरीय बनाएंगे। दूसरी तरफ विश्वविद्यालय परिसर की सीवर लाइन को पास के मैनहोल से जोड़ने का निर्णय लिया गया। यह काम 13 जून के बाद होगा। इससे पहले गंगानाथ झा छात्रावास के सीवर को मुख्य लाइन से जोड़ने के लिए बजट का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। मंडलायुक्त ने परिसर के रखरखाव के लिए बागवानी, फसाड सुधार, बाउंड्री आदि बिंदुओं और दो वर्ष के मेंटेनेंस को जोड़ते हुए एक प्रस्ताव बनाने को कहा।
राजकीय निर्माण निगम के अधिकारियों को परिसर की बाउंड्री वॉल बनाने और मरम्मत का कार्य एक सप्ताह में पूरा करने को कहा। पूरे हो चुके कार्यों का निरीक्षण कर हैंडओवर की प्रक्रिया पूरी कराएं। विश्वविद्यालय प्रशासन से भेजे गए डिफेक्ट लिस्ट और अन्य समस्याओं का निस्तारण अगले सप्ताह तक कराएं। राजकीय निर्माण निगम को विश्वविद्यालय मुख्य द्वार के पास रखे मलबे को तत्काल हटाने को कहा। ऑनलाइन संस्कृत प्रशिक्षण के लिए आवश्यक सेटअप लगाएं।
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के नवागत कुलसचिव राकेश कुमार ने कहा कि ऑनलाइन संस्कृत प्रशिक्षण केंद्र और आईकेएस की शुरुआत में देरी के कारणों की जांच कराई जाएगी और जिम्मेदारी भी तय होगी। निर्धारित समय में इंडियन नॉलेज सिस्टम की शुरुआत क्यों नहीं हो सकी, यह जांच का विषय है। 59वें कुलसचिव के रूप में शुक्रवार को पदभार ग्रहण करने के बाद राकेश कुमार ने कहा कि शासन की मंशा के अनुसार विश्वविद्यालय में पठन-पाठन और अनुशासन पहली प्राथमिकता होगी। संस्कृत से ही संस्कृति है और अगर संस्कृत कमजोर रहेगी तो संस्कृति भी विकृत होगी। संस्कृत की बदौलत ही भारत विश्वगुरु बनने की राह पर आगे बढ़ रहा है।
स्वागत करने पहुंचे एक वरिष्ठ प्रोफेसर के कुर्ते पर पान की पीक देखकर राकेश कुमार ने नसीहत दे डाली। कुलसचिव ने कहा कि आप प्रोफेसर हैं और इस तरह आपके कुर्ते पर पान की पीक शोभा नहीं देती है। आपको पद की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए। कुलसचिव के इस तेवर पर प्रोफेसर कुछ भी जवाब नहीं दे सके।