डालिम्स, जैयपुरिया, स्मिथ, सेंट जांस, केंद्रीय विद्यालय समेत 25 से अधिक स्कूलों के छोटे-बड़े वाहनों की आवाजाही होती थी। अभिभावक पंडित सुरेंद्रनाथ तिवारी ने बताया कि बच्चे सुबह 6 बजे घर से निकल रहे हैं तो फिर घर लौटने में अपराह्न ढाई से तीन बज रहा है। बच्चों की परेशानियां बढ़ गई हैं। अभिभावकों का भी प्रबंधन गड़बड़ हो चुका है।
कोई दुकान बंद कर रहा है तो कोई काम से छुट्टी लेकर लौट रहा : स्कूली बस सेवा बंद होने से लोगों का कामकाज प्रभावित हो रहा है। ब्रह्मनाल निवासी अभिभावक गोपाल मिश्रा ने बताया कि अपराह्न के समय बच्चों को लेने के लिए गिरजाघर जाना पड़ रहा है। गाड़ियां बंद होने के कारण पैदल जाइए या फिर रिक्शा से लेकर आइए। कोई दुकान बंद कर जा रहा है तो कोई अपने काम से छुट्टी लेकर बच्चों को लेने पहुंच रहा है।
माघ मेले को लेकर इस रूट पर यातायात दबाव बहुत है। पहले से ही स्कूली वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित है, लेकिन कुछ निजी स्कूलों के वाहनों की आवाजाही हो रही थी। अब उन्हें भी प्रतिबंधित कर दिया गया है। यातायात दबाव कम होने के बाद पहले की तरह स्कूल की छोटी गाड़ियों की आवाजाही मान्य होगी। - अंशुमान मिश्रा, एडीसीपी यातायात