टूरिज्म वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष राहुल मेहता ने कहा कि विदेशी पर्यटकों को खरीदारी पर जीएसटी में छूट देनी चाहिए। पांच साल पहले भारत सरकार द्वारा घोषणा के बाद भी इस पर काम नहीं हो पाया है। उद्यमी उमाशंकर अग्रवाल ने कहा कि कई वस्तुओं पर जीएसटी दरें अलग-अलग हैं। उदाहरण के तौर पर 1000 रुपये मूल्य के नीचे के रेडीमेड कपड़ों पर पांच प्रतिशत और 1000 मूल्य से ऊपर 12 प्रतिशत। जबकि दोनों एक ही दुकान पर बिकते हैं।
उत्तर प्रदेश कोरूगेटेड बाक्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन वाराणसी के अध्यक्ष मोहम्मद सादिक ने कहा कि कोरूगेटेड पेपर पैकिंग बॉक्स पर जीएसटी दर 18 प्रतिशत है, जबकि इसके रॉ मैटेरियल जैसे क्राफ्ट पेपर, डुप्लेक्स बोर्ड आदि पर जीएसटी दर 12 प्रतिशत है। कोरूगेटेड पेपर पैकिंग बॉक्स पर भी जीएसटी दर 12 प्रतिशत ही होनी चाहिए। पूजा सामग्री के निर्माता उद्यमी अमित गुप्ता ने बताया कि गंगाजल पर जीएसटी की दर में स्पष्टता नहीं है।
आईआईए के डिवीजन चेयरमैन अनुपम देवा ने कहा कि आयकर विभाग की ही तरह जीएसटी के रिफंड की प्रक्रिया भी पारदर्शी हो। सरकार से मांग की कि प्रोपराइटरशिप और पार्टनरशिप एमएसएमई को भी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तरह ही आयकर प्रावधानों के अंतर्गत रखा जाए।
पूर्वांचल निर्यातक संघ के पूर्व अध्यक्ष राजीव अग्रवाल ने कहा कि विदेश व्यापार के लिए ईसीजीसी की तर्ज पर ही डोमेस्टिक व्यापार के लिए डीसीजीसी की स्थापना की जानी चाहिए। इस दौरान काशी समेत पूर्वांचल में औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के लिए 10 बिंदुवार सुझाव और मांग का प्रस्ताव वित्त मंत्रालय को भेजे जाने पर सहमति बनी। बैठक में अवधेश गुप्ता, गौरव गुप्ता, सर्वेश अग्रवाल, पंकज अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
दी स्माल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश भाटिया ने कहा कि बड़े उद्योगों और सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों के लिए अलग-अलग श्रम कानून होने चाहिए। सूक्ष्म एवं लघु उद्योग उन्हें माना जाए जो 1000 वर्ग मीटर भूखंड में तथा अधिकतम 50 कर्मचारियों वाले हों।
रामनगर इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के महामंत्री राकेश जायसवाल ने कहा कि निवेश मित्र पोर्टल के माध्यम से फैक्ट्री एक्ट रजिस्ट्रेशन, अग्निशमन विभाग से एनओसी, प्रदूषण नियंत्रण विभाग से लाइसेंस आदि की प्रक्रिया जटिल है। इसी प्रकार यूपीसीडा और राजकीय औद्योगिक आस्थानों में भू स्थानांतरण और नक्शा सबमिट करने की प्रक्रिया भी जटिल है।
पीवीसी पाइप के निर्माता उद्यमी दिनेश जैन ने कहा कि बिजली विभाग में नया कनेक्शन लेने और कनेक्शन निरस्त करने की प्रक्रिया को आसान किया जाना चाहिए। द स्माॅल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के महासचिव नीरज पारीक ने इंडस्ट्रियल एरिया (जहां क्लस्टर में उद्योग लगे हों) आदि इलाके में प्रदूषण नियंत्रण के लिए कॉमन ईटीपी लगाने को कहा। इससे उद्यमी पर्यावरण विभाग के उत्पीड़न से बचेगा।
मिर्जापुर व आजमगढ़ मंडल के डिवीजनल चेयरमैन प्रशांत अग्रवाल, चैप्टर के सचिव गौरव गुप्ता ने भूगर्भ जल विभाग द्वारा किए जा रहे उत्पीड़न की बात रखी। कहा कि उद्योगों द्वारा लगभग 6 प्रतिशत भूगर्भ जल का उपयोग किया जाता है और 90 प्रतिशत से ज्यादा उद्योगों में जल का कोई उपयोग नहीं होता। भूगर्भ जल कर्मचारियों के पीने और टॉयलेट के प्रयोग में होता है। इन उद्योगों को भूगर्भ जल विभाग में रजिस्ट्रेशन की जटिल प्रक्रिया से मुक्त किया जाए।