वाराणसी। पंचायत चुनाव के लिए मतदाता सूची के पुनरीक्षण का कार्यक्रम एक अक्तूबर से शुरू होगा। घर-घर जाकर बीएलओ मतदाता सूची का सत्यापन करेंगे। इसके पूर्व बीएलओ की तैनाती और उनके प्रशिक्षण का कार्य होगा। बीएलओ की तैनाती के लिए डाटा फीडिंग का काम चल रहा है। गांव में बीएलओ की तैनाती को लेकर खेल शुरू हो गया है। प्रधान और दावेदार अपने पसंद के लोगों को बीएलओ बनाने की जुगत में लग गए हैं।
दरअसल कई गांव में जिन लोगों को बीएलओ बनाया जा रहा है। उनकी प्रधान से नहीं बनती है। यही कारण है कि वर्तमान प्रधान उनकी जगह अपने लोगों को लगाने में जुटे हैं। उधर, दावेदार भी चुनाव को देखते हुए अपने मनपसंद के बीएलओ को तैनात कराने में लग गए हैं। इसके लिए सत्ता पक्ष के नेताओं का सहारा लिया जा रहा है। उनके यहां दरबार लगने शुरू हो गए हैं। उधर, गांवों में बीएलओ की तैनाती को लेकर दावेदार सतर्क हो गए हैं। वे अपने अपने तरीके से ताल ठोकने में लगे हैं। कई गांव में परिसीमन को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। आरोप प्रत्यारोप के बीच दावेदारी करने वालों ने प्रचार शुरू कर दिया है।
61 गांवों में बदल जाएगी चुनावी तस्वीर
उधर नगर निगम की सीमा में 61 ग्राम पंचायतों (आंशिक पंचायत समेत 79 राजस्व गांव) के शामिल होने के कारण त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तस्वीर बदल जाएगी। हरहुआ, चिरईगांव व काशी विद्यापीठ ब्लाक के इन गांवों में इस बार बीडीसी व ग्राम पंचायत सदस्यों की संख्या घट जाएगी। 61 ग्राम प्रधान की कुर्सी की जंग खत्म होगी। इन वार्डों में पार्षद का चुनाव 2022 में होगा।
बीएलओ की डाटा फीडिंग कराई जा रही है। उसके बाद प्रशिक्षण का कार्यक्रम होगा। डाटा फीडिंग कंप्यूटर के माध्यम से हो रही है और उनकी तैनाती भी कंप्यूटर के माध्यम से होगी। आयोग की गाइडलाइन के अनुसार बीएलओ की तैनाती होगी।- राजाराम वर्मा, पंचायत एवं निकाय के सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी