वाराणसी। सरकार केंद्रीय पंचायतीराज अधिनियम में कुछ संशोधन करने वाली है। यदि अधिनियम में संशोधन हुआ तो चुनाव खर्च का ब्योरा जमा नहीं करने वाले इस बार चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। काशी में करीब 90 प्रतिशत पंचायत प्रतिनिधियों ने चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों और नियमों का पालन नहीं किया है और चुनावी खर्च का ब्योरा जमा नहीं किया है। अब अधिनियम में संशोधन की तैयारी को देखते हुए दावेदारों की धुकधुकी बढ़ गई है।
पंचायत चुनाव लड़ने का सपना देख रहे कई मौजूदा प्रधान, बीडीसी और जिला पंचायत सदस्यों का सपना टूटने वाला है। काशी करीब 90 प्रतिशत आयोग ने चुनाव के समय खर्च का ब्योरा जमा करने का आदेश जारी किया था। आयोग ने तब कहा था कि अगर किसी प्रत्याशी ने चुनाव में हुए खर्च का ब्योरा नहीं दिया तो वह चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य करार दिया जा सकता है। चुनाव आयोग के इस आदेश को न केवल जीतने वाले, बल्कि हारने वालों को मिलाकर करीब 90 प्रतिशत प्रत्याशियों ने पालन नहीं किया है। ऐसे में अब आगामी चुनाव में नामांकन के समय निर्वाचन आयोग यह देखेगा कि किसने ब्योरा दिया है और किसने नहीं। जिन लोगों ने ब्योरा नहीं दिया है, उन्हें चुनाव आयोग चुनाव लड़ने के अयोग्य ठहराया जा सकता है। जिला पंचायत सदस्य संजय मिश्र ने बताया कि चुनाव लड़ने की पात्रता आयोग को तय करनी है। चुनाव आयोग के अगले कदम का इंतजार किया जा रहा है। सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी राजाराम वर्मा ने बताया कि पंचायत चुनाव लड़ने की पात्रता के संबंध में अंतिम निर्णय चुनाव आयोग को लेना है। बनारस में भी करीब 90 प्रतिशत प्रत्याशी हैं, जिन्होंने चुनावी खर्च का ब्यौरा नहीं दिया है।
टल सकता है मतदाता पुनरीक्षण अभियान
सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी राजाराम वर्मा ने बताया कि आज (15 सितंबर) से मतदाता पुनरीक्षण शुरू होना था। लेकिन इस संबंध में अभी अधिसूचना जारी नहीं हुई है। जैसे अधिसूचना जारी होगी वैसे ही पुनरीक्षण का काम शुरू करा दिया जाएगा। इसे देखते हुए माना जा रहा है कि मतदाता पुनरीक्षण अभियान अब एक अक्तूबर से शुरू होगा।
नियमों में संशोधन की तैयारी में है सरकार
ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के चुनावों को लेकर योगी सरकार बड़ा संशोधन करने की तैयारी में है। दरअसल, जनसंख्या नियंत्रण को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार दो से अधिक बच्चों वाले उम्मीदवारों के पंचायत चुनाव लड़ने पर रोक लगा सकती है। इसके साथ ही उम्मीदवारों के न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता भी निर्धारित करने की तैयारी है।