वाराणसी। निर्जला एकादशी पर भी कोरोना महामारी का असर रहा। न तो गंगा घाट और न ही बाबा के दरबार में श्रद्धालुओं को प्रवेश मिला। घाट सूने पड़े रहे और दो दशकों से बाबा के जलाभिषेक की परंपरा भी नहीं निभाई जा सकी।
मंगलवार को ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष एकादशी को भीमसेनी एकादशी मनाई गई। हर साल हजारों की संख्या में घाट पर दान कर गंगा नहाने वाले श्रद्धालुओं ने कोरोना संक्रमण के चलते घरों में ही पूजा की। दशाश्वमेध घाट, अस्सी घाट, पंचगंगा घाट सहित सभी प्रमुख घाटों पर सन्नाटा रहा। पुलिस प्रशासन ने भी सख्ती की और किसी को भी घाटों की ओर नहीं जाने दिया। हालांकि, रामनगर और आसपास के गांव वालों की कुछ भीड़ गंगा किनारे दिखी। उन्होंने गंगा की रेती की ओर गंगा स्नान किया। केंद्रीय देव दीपावली महासमिति के अध्यक्ष वागीश मिश्रा ने बताया कि प्रचंड गर्मी के बीच इस व्रत को निर्जला अर्थात बिना जल के रहने की परंपरा है। इस बार लोगों ने घरों ही परंपरा का निर्वहन किया। कोरोना संक्रमण को देखते हुए इस बार प्रशासन ने कलश यात्रा और बाबा विश्वनाथ के जलाभिषेक की अनुमति नहीं दी थी।