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Varanasi News: एलोपैथी की तर्ज पर हो आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी चिकित्सा फार्मेसी की शिक्षा

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वाराणसी। आईएमएस बीएचयू के आयुर्वेद संकाय के धनवंतरि भवन के समिति कक्ष में हुए कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से बनाए गए राष्ट्रीय भेषजीय आयोग अधिनियम 2026(नेशनल फार्मेसी कमीशन अधिनियम) पर चर्चा हुई। इस दौरान वक्ताओं ने एलोपैथी की तर्ज पर ही आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति में फार्मेसी की शिक्षा की बात कही।
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कमीशन की ओर से बनाए गए फार्मेसी नियमावली पर आयुर्वेद संकाय के रसशास्त्र विभाग के प्रो. आनंद चौधरी ने बताया कि केंद्र सरकार ने इस नियमावली के संदर्भ में संबंधित सभी प्रभावित पक्षों से 28 जुलाई तक सुझाव मांगा है। सरकार ने इस अधिनियम से भारत में औषधियों के निर्माण में तकनीकी सुदृढ़ता सहित सुधार लाने के लिए सभी चिकित्सा पद्धतियों(आधुनिक चिकित्सा एलोपैथी, आयुर्वेद, सिद्धा, यूनानी और होम्योपैथी) के लिए नए नियम कानून बनाए हैं। इस अधिनियम के लागू होने के पश्चात सभी चिकित्सा पद्धतियों की गुणवत्ता में वृद्धि होगी। ऑनलाइन बैठक में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान गोवा से डॉ. शिल्पा पाटिल, राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान मानित विवि जयपुर से डॉ राकेश सिंह, बीएचयू से डॉ. गुरु प्रसाद नीले साथ ही डॉ. कनिका,डॉ. गायत्री, डॉ. शिवम, अपर्णा, अंजू आदि ने सहभागिता की।
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ऑनलाइन बैठक में दिया गया यह सुझाव
- आयुर्वेदिक फार्मेसी कॉलेज के स्तर में सुधार लाते हुए नए आयुर्वेद फार्मेसी कॉलेज खोले जाएं।
- प्रस्तावित राष्ट्रीय फार्मेसी रजिस्टर में उन राज्यों के आयुर्वेदिक फार्मासिस्ट को भी अंकित किया जाए, जिन राज्यों में आज भी आयुर्वेदिक फार्मासिस्ट का पंजीकरण नहीं होता है।
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- राष्ट्रीय भेषजीय आयोग द्वारा प्रस्तावित राष्ट्रीय एग्जिट परीक्षा में बी फार्मा आयुर्वेद के लिए अलग से प्रश्न पत्र बनाए जाएं, जो कि आयुर्वेदिक विषयों को भी समाहित करें। अभी आयोग सभी चिकित्सा पद्धतियों के फार्मेसी स्नातकों के लिए एक ही टेस्ट का प्रावधान की है।
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- बी-फार्मा आयुर्वेद में प्रवेश के लिए न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक इंटरमीडिएट में विज्ञान के विषयों के साथ हो।
- आयुर्वेद फार्मेसी में नियुक्ति के लिए केवल बी फार्मा आयुर्वेद को ही अनिवार्य किया जाए, अभी बीएससी भी लिए जाते हैं, उसे बंद किया जाए।
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