वाराणसी। जीवन में शिक्षक का बड़ा महत्व है। बच्चे की पहली शिक्षक उसकी मां होती है। जब बच्चा स्कूल जाता है शिक्षक उसके जीवन को सही दिशा देते हैं। यूं तो छात्रों के लिए सारे शिक्षक शिक्षिकाएं खास होते हैं। मगर कुछ ऐसे होते हैं जो छात्र का जीवन ही बदल देते हैं। वह सरकार तथा प्रशासन की तरफ से मिल रही सुविधाओं से ऊपर उठकर विद्यार्थियों के लिए तमाम तरह की कोशिशें करते हैं। ताकि उन्हें जिंदगी में एक नए मुकाम तक पहुंचाया जा सके। शहर में कई ऐसे लोग हैं जो शिक्षा की अलख जगा रहे हैं। शिक्षक दिवस पर हम ऐसे ही लोगों से आपको रूबरू कराएंगे।
सरकारी शिक्षा की बदलती तस्वीर बना रहे शिक्षक
काशी विद्यापीठ ब्लाक के पूर्व कम अपोजिट विद्यालय केराकतपुर में कार्यरत सहायक अध्यापक अंजू चौबे स्कूल के बच्चों को शारीरिक एवं मानसिक रूप से दुरुस्त रखने के लिए प्रयासरत रहती हैं। इस लिए अंजू बच्चों की प्रिय शिक्षिका भी हैं। 2016 में वाराणसी आने के बाद उन्होंने इस विद्यालय को ज्वाइन किया। अंजू वॉलिंटियर काउंसलर भी हैं। काशी अनाथालय और चाइल्ड लाइन के साथ मिलकर लोगों को की काउंसलिंग भी करती हैं। काउंसलर होने का फायदा विद्यालय में बच्चों की संख्या बढ़ाने में मिला। जिसकी बदौलत आज विद्यालय में 400 बच्चे नामांकित हैं। अपनी काउंसलिंग के द्वारा उन्हें विद्यालय में अपव्यय और अवरोधन रोकने में काफी मदद मिली। परिणामस्वरूप बच्चों के शैक्षिक गुणवत्ता में काफी सुधार हुआ। कोरोना काल में भी अंजू अपने स्तर से बच्चों को ऑनलाइन और ऑफलाइन शिक्षा दे रही हैं। अंजू किताबी ज्ञान के अलावा बच्चों को अन्य गतिविधियों में भी प्रशिक्षित करती हैं। विभागीय प्रतियोगिताओं से इतर विद्यालय की दो छात्राओं ने गंगा महोत्सव में 10,000 और 5000 के नकद पुरस्कार जीता। बच्चों के साथ अंजू को भी सर्वश्रेष्ठ शिक्षक व टीएलएम प्रदर्शनी में पुरस्कार मिल चुका है।
कथा सम्राट के गांव में विद्यालय की बदली सूरत
कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद के गांव लमही में स्थित प्राथमिक विद्यालय मढंवा के हेड मास्टर शिवाजी सिंह ने जब 2010 में विद्यालय में कार्यभार संभाला तो वहां की स्थिति बिल्कुल ठीक नहीं थी। 2003 में बने विद्यालय की बदतर स्थिति को देखकर उन्होंने इस संवारने की प्रतिज्ञा ली। स्थानीय लोगों, ग्राम सभा मढंवा एवं लमही के ग्राम प्रधानों के साथ तालमेल व शिक्षकों के साथ मिलकर सबसे पहले अभिलेखीय कार्य पूर्ण कराएं। जिसके बाद विद्यालय के भौतिक परिवेश को ठीक कराने के लिए जिला प्रशासन के सहयोग से विद्यालय की जमीन पर कब्जा हटवाया। विद्यालय की बाउंड्री वॉल बनवाई। परिसर पहले जुआरियों व नशेड़ियों का अड्डा हुआ करता था। इसके लिए उन्होंने अभियान चलाकर परिसर को मुक्त कराया। कंप्यूटर शिक्षा की शुरुआत 2014 में कराई गई। अब यह प्राथमिक विद्यालय क्षेत्रीय कान्वेंट स्कूल के मुकाबले बेहतर स्थिति में है। जहां बच्चों के लिए स्मार्ट क्लास, मॉडल शौचालय, डाइनिंग हॉल, पुस्तकालय और गेम्स रूम उपलब्ध है। 165 छात्रों वाले स्कूल में बच्चों को वीडियो और दीक्षा ऐप के जरिए पढ़ाई कराई जाती है।