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नैक मूल्यांकन के बाद ही मिलेगी नए पाठ्यक्रम को मान्यता

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वाराणसी। नैक से मूल्यांकन को लेकर यूजीसी व शासन और सख्त हो गया है। कुलाधिपति आनंदी बेन पटेल ने निर्देश दिया है कि विश्वविद्यालय व महाविद्यालयों को अब हर हाल में नैक से ग्रेडिंग हासिल करनी होगी। मूल्यांकन नहीं कराने वालों के अनुदान सहित कई सुविधाएं रोकी भी जा सकती हैं। इसमें वित्तीय अनुदान से लेकर नए पाठ्यक्रम की मान्यता भी शामिल है।
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महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से संबद्ध 310 महाविद्यालय वाराणसी, भदोही, चंदौली, मिर्जापुर और सोनभद्र में हैं। इसमें से लगभग 16 ने ही नैक से मूल्यांकन कराया है। अनुपात पर गौर करें तो नैक से ग्रेडिंग हासिल करने वाले महाविद्यालयों की संख्या अब काफी कम है। हालांकि विद्यापीठ प्रशासन की ओर से संबद्ध महाविद्यालयों को मूल्यांकन के लिए प्रेरित करने के लिए साल में दो बार कार्यशाला आयोजन की तैयारी की गई थी। आइक्यूएसी के समन्वयक प्रो. कृपाशंकर जायसवाल ने बताया कि सत्र 2012-13 में जहां नैक से मूल्यांकन कराने वाले संबद्ध कालेज की संख्या पांच थी। अब बढ़कर 16 हो गई है।
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. प्रेम नारायण सिंह का कहना है कि नैक के मूल्यांकन से गुणवत्ता में सुधार आएगा। शिक्षा केस्तर के साथ ही महाविद्यालयों में जो गुणवता के मानक हैंऔर बेहतर होंगे। महाविद्यालयों को आगे बढ़कर नैक मूल्यांकन के लिए प्रयास करना चाहिए।
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बता दें कि कुलाधिपति ने पांच साल पुराने हो चुके महाविद्यालयों को अनिवार्य रूप से मूल्यांकन कराने के निर्देश दिए हैं साथ ही मूल्यांकन करवाने में लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई की बात कही है। उच्च शिक्षण संस्थाओं को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान अथवा किन्हीं अन्य संस्थाओं से वितीय सहायता प्राप्त करनी है, तो उन्हें अनिवार्य रूप से नैक संस्था से मूल्यांकन कराना ही होगा।
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पूर्वांचल में विश्वविद्यालय 4
नैक से ए ग्रेड 0
राजकीय डिग्री कॉलेज 159
नैक से मूल्यांकन 29
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