वाराणसी। बीएचयू की कार्यकारिणी परिषद (ईसी) की बैठक में माना गया कि सर सुंदरलाल अस्पताल में चिकित्सा अधीक्षक और ट्रॉमा सेंटर प्रभारी के पदों पर नई नियुक्तियों में देरी हुई है। बैठक में बताया गया कि आईएमएस-बीएचयू की गवर्निंग बॉडी नहीं होने के कारण यह स्थिति बनी है, क्योंकि इन पदों की चयन समिति में गवर्निंग बॉडी का एक सदस्य शामिल होता है। वर्ष 2023 में गवर्निंग बॉडी का कार्यकाल समाप्त हो चुका है और अब उसका पुनर्गठन किया जाना है।
आईएमएस निदेशक प्रो. एसएन संखवार ने बताया कि गवर्निंग बॉडी के पुनर्गठन का प्रस्ताव मंत्रालय को भेजा जा चुका है। ईसी बैठक में इस प्रक्रिया में तेजी लाने और दोनों पदों पर जल्द इंटरव्यू कराने की बात कही गई। बैठक में डीएसीपी (डायनमिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन) नियम के तहत एक से डेढ़ महीने के भीतर प्रमोशन देने का निर्णय भी लिया गया। कहा गया कि जो भी मामला कोर्ट में गया है, उसे वापस लिया जाए और अब प्रमोशन में कोई गतिरोध नहीं होगा। सभी विवादों का निस्तारण संस्थान स्तर पर ही किया जाएगा। हालांकि, शिक्षकों की असहमति इस बात पर रही कि बिना इंटरव्यू के ही उनका प्रमोशन किया जाएगा, क्योंकि डीएसीपी की गाइडलाइन में इंटरव्यू का उल्लेख नहीं है। शिक्षकों का कहना था कि बीएचयू ने वर्ष 2024 और उससे पहले भी इंटरव्यू लिए, लेकिन प्रमोशन नहीं किया गया।
लंबा एजेंडा ईसी की गुणवत्ता के लिए ठीक नहीं
ईसी बैठक में यह भी माना गया कि बैठकों के बीच लंबा अंतराल होने से दस्तावेजों का बोझ बढ़ जाता है। इतनी लंबी बैठक गुणवत्ता के लिहाज से भी उचित नहीं मानी गई। इस कारण अब हर तीन महीने पर बैठक कराने का निर्णय लिया गया। इस फैसले का सभी सदस्यों ने स्वागत किया। सदस्यों का कहना था कि लंबा अंतराल होने पर एजेंडा बड़ा हो जाता है, जिससे उसका मूल्यांकन कठिन हो जाता है। बीएचयू के ज्यादातर एसोसिएट प्रोफेसरों को प्रोफेसर का दर्जा दे दिया गया। कैश प्रमोशन के तहत कई शिक्षक अब डॉक्टर के बजाय प्रोफेसर लिखना शुरू कर चुके हैं।