महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से संबद्ध सामूहिक नकल में आरोपित बलिया के आठ कॉलेजों की कापियों का परीक्षण कराया जाएगा। इसके लिए विषयवार विशेषज्ञों को जिम्मेदारी दी जाएगी। संबंधित परीक्षार्थियों का परीक्षाफल तब तक रुका रहेगा जब तक कि इस बारे में कोई फैसला न हो जाए। मंगलवार को हुई परीक्षा समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया।
कुलपति डॉ. पृथ्वीश नाग की अध्यक्षता में हुई समिति की बैठक में कई अहम बिंदुओं पर चर्चा हुई। परीक्षा नियंत्रक ओम प्रकाश ने बताया कि बलिया कि आठ कॉलेजों के अलावा इसी जिले के बाबा सखराज स्मारक महाविद्यालय के एक विद्यार्थी द्वारा कापी में अश्लील टिप्पणी लिखे जाने पर उसकी परीक्षा निरस्त करने के साथ उसे कॉलेज से निष्कासित कर दिया गया। संबंधित कॉलेज पर अनियमितता के मामले में तीन लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। इसके अलावा मिर्जापुर के रामानुज प्रताप कॉलेज पर परीक्षा संबंधी गड़बड़ी और बलिया के मां कलावती देवी महिला महाविद्यालय में नकल के नाम पर धन उगाही के आरोप में तीन साल के लिए डिबार कर दिया गया।
बलिया के मां कलावती देवी कॉलेज के मामले में जांच समिति भी गठित होगी, जिसके लिए कुलपति को अधिकृत किया गया। परीक्षा नियंत्रक ने बताया कि इसके अलावा बलिया के आशा सिंह महाविद्यालय पर तीन लाख अर्थदंड और तीन साल के लिए डिबार करने का फैसला हुआ। बताया कि वर्ष 2015 में सामूहिक नकल में आरोपित कॉलेजों के मामले में हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में अनुचित साधन में आरोपित छात्रों की कापियों का मिलान कर कार्रवाई करने और बाकी का परीक्षाफल घोषित करने का फैसला हुआ। ऐसे कॉलेजों को भी तीन-तीन लाख अर्थदंड देना होगा।
विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध कॉलेजों में बैक पेपर के परीक्षार्थियों को अगली कक्षा में सर्शत अस्थायी प्रवेश दिया जाएगा। इसके लिए उनसे इसबात का शपथ पत्र लिया जाएगा कि जब वे बैक पेपर में उत्तीर्ण होंगे तभी अगली कक्षा में परीक्षा फार्म भर पाएंगे। ऐसा न होने पर भूतपूर्व माने जाएंगे।