एक दिन में इस पार्क में दो से तीन दिनों में शराब की 10, बीयर की 20, प्लास्टिक की 150 बोतलों के साथ ही 500 से ज्यादा गोगो रैपर, और सिगरेट व तंबाकू के 100 से ज्यादा खाली पैकेट मिले हैं। जब कुछ छात्रों की नजर पड़ी तो उसे उठवाकर बीएचयू के स्वच्छता एवं सहायक सेवाएं कार्यालय को सौंप दिया। वहीं एबीवीपी संगठन की ओर से इस गंदगी को लेकर चेतावनी भी दे दी गई है।
तालाब के पास खड़े होना भी दूभर है
एबीवीपी इकाई अध्यक्ष शोध छात्र पल्लव सुमन ने बताया कि मधुबन जैसे स्थल पर इस तरह की नशीली वस्तुएं, धूम्रपान सामग्री और गंदगी दिखाती है कि यह पार्क विश्वविद्यालय का हिस्सा न होकर बाहरी असामाजिक तत्वों का अड्डा बनता जा रहा है। इससे विद्यार्थियों के लिए भी बेहद गलत और असुरक्षित वातावरण तैयार हो रहा है। पूरे पार्क में कहीं भी प्रॉक्टोरियल बोर्ड का गार्ड किसी पर रोकटोक नहीं करते। मधुबन में जहां तालाब है वहां पर इतनी गंदगी है कि एक मिनट खड़े होना भी दूभर है। पार्क में किसी ओर से कोई सामान डंप करने की जगह नहीं है फिर भी इतनी गंदगी।
नियमित निगरानी और सीसीटीवी सर्विलांस की मांग
छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इस पर कठोर और प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो मधुबन जैसे बड़े जगहों की पवित्रता और पहचान पूरी तरह प्रभावित हो सकती है। विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की गई है कि यहां पर नियमित निगरानी, पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी सर्विलांस और स्वच्छता की स्थाई व्यवस्था तय की जाए। परिसर में नशीले पदार्थों के सेवन, धूम्रपान और गंदगी फैलाने वाले लोगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।
एबीवीपी विश्वविद्यालय इकाई के स्टूडेंट ऑफ डेवलपमेंट की ओर से 'मिशन मधुबन' अभियान के अंतर्गत आज संडे फॉर बीएचयू कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है। इसके माध्यम से विश्वविद्यालय परिसर स्थित मधुबन में व्यापक स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य परिसर को सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त बनाना और विश्वविद्यालय के सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक स्वरूप को संरक्षित करना था। स्वच्छता अभियान के दौरान जो स्थिति सामने आई, वह अत्यंत चिंताजनक एवं विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए गंभीर सोच का विषय है।
बढ़ेगी सुरक्षागार्डों की पेट्रोलिंग
कैंपस में हर जगह पर रूटीन पेट्रोलिंग होती है। मधुबन में भी इसी तरह की निगरानी रखी जाती है उसका कोई समय तय नहीं है। हालांकि शाम को सात बजे तक पार्क बंद हो जाता है। मेरे संज्ञान में अभी तक नशे जैसी बात नहीं आई है लेकिन यदि ऐसी प्रवृत्ति बढ़ी है तो इस पर उचित कार्रवाई की जाएगी। वहां पर सुरक्षागार्डों की तैनाती बढ़ेगी। -प्रो. संदीप पोखरिया, चीफ प्रॉक्टर, बीएचयू