Varanasi News: वाराणसी जिले में आने वाले सात देशों के पर्यटकों पर रिसर्च किया गया है। अध्ययन के मुताबिक, बाबा धाम व सात घाटों पर 58% भक्त 24 भाषाएं बोलते हैं। वहीं 42 % हिंदी वाले हैं।
काशी में आने वाले दर्शनार्थियों की भाषाई विविधता कई देशों से ज्यादा है। काशी विश्वनाथ मंदिर, दशाश्वमेध घाट और अस्सी सहित काशी के आठ पवित्र स्थलों पर हर दिन 25 भाषाएं बोलने वाले दर्शन-पूजन, आरती और गंगा विहार के लिए आते हैं। इनमें से सिर्फ 42 फीसदी श्रद्धालु ही हिंदी भाषी हैं जबकि बाकी 24 तरह की भाषाएं बोलते हैं। इनमें से छह फीसदी विदेशी भाषाओं के सैलानी हैं।
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बीएचयू के डीएवी पीजी कॉलेज की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. महिमा सिंह और उनकी शोध टीम की ओर से किए गए अध्ययन में ये आंकड़े सामने आए हैं। ये रिसर्च आईसीसीएसआर के एक मेगा प्रोजेक्ट के तहत किया गया है।
काशी के आठ पवित्र जगहों में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के गेट संख्या चार, गंगा द्वार स्थित ललिता घाट, त्रिपुर भैरव घाट, मान मंदिर घाट, दशाश्वमेध घाट, मणिकर्णिका घाट और अस्सी घाट पर आए भक्तों पर अध्ययन कर ये आंकड़े निकाले गए हैं।
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जर्मन, जैपनीज, इटैलियन और स्पैनिश बोलने वाले
विदेशी भाषाई सैलानियों में तीन फीसदी फ्रेंच, नेपाल व इटैलियन के दो फीसदी और जर्मन, जैपनीज व स्पैनिश बोलने वाले श्रद्धालुओं की संख्या एक फीसदी है। भारतीय भाषाओं में सबसे ज्यादा सात फीसदी तमिल, छह फीसदी तेलुगु और बंगाली, पांच फीसदी मराठी, भोजपुरी, मैथिली और मलयालम के तीन-तीन फीसदी, मारवाड़ी, अंग्रेजी, कन्नड़ और कोकबोरोक (त्रिपुरी) भाषा के दो-दो फीसदी भक्त आते हैं। वहीं बुंदेली, बघेली, असमिया, अवधी, झारखंड के खोर्था, गुजराती, पंजाबी भाषा के भक्तों की संख्या एक-एक फीसदी है। इस अध्ययन में उन्होंने काशी की लोक संस्कृति और आध्यात्म आधारित विविधता का पता लगाया है। इसे मापने के लिए इन्होंने ग्रीनबर्ग नियम का इस्तेमाल किया है।
37 भक्त ही समझ पाते हैं संस्कृत
इस अध्ययन में 12 फीसदी विदेशी नागरिक और 88 फीसदी भारतीय श्रद्धालु शामिल हैं। समूह में 37 फीसदी भक्तों को ही संस्कृत समझ में आती है। 89.8 फीसदी भारतीयों को अंग्रेजी समझ में आती है। वहीं, 10.2 फीसदी आबादी को अंग्रेजी नहीं आती। अंग्रेजी समझने वाले 89.8 फीसदी लोगों में से 80.7 फीसदी लोग अंग्रेजी बोल भी सकते हैं। 88 फीसदी भारतीयों में से 15.3 फीसदी लोग जर्मन, फ्रेंच, स्पैनिश, अरबी और जापानी जैसी विदेशी भाषाएं समझते हैं।
40 लाख का मिला है प्रोजेक्ट
प्रोजेक्ट निदेशक डॉ. महिमा सिंह ने बताया कि उनका प्रोजेक्ट काशी विश्वनाथ: कलात्मकता और लोकप्रिय स्मृति में: सांस्कृतिक कॉरिडोर की कला, शिल्प और लोक प्रथाओं का एक अध्ययन के नाम से है। इसे आईसीएसएसआर, नई दिल्ली की ओर से वित्त पोषित किया गया है। इसके लिए 40 लाख रुपये का फंड दिया गया है। इस अध्ययन में शुभम कुमार, श्रीयुक्त बसनेत शामिल रहे।