आगे उन्होंने लिखा कि काशी विद्यापीठ के पास ही और भी जमीन मैंने खरीद रखी है, जिस पर भारत माता मंदिर का निर्माण हो रहा है। मेरी यह इच्छा है कि मंदिर की देखरेख का भार मंदिर बनने के बाद मेरी शर्तों के अनुसार काशी विद्यापीठ करे।
उस जमीन में इतना स्थान है कि मंदिर के एक ओर विज्ञान की प्रयोगशाला और उसके ऊपर वेधशाला व दूसरी तरफ पुस्तकालय भवन का निर्माण कराया जाए। उन्होंने आगे लिखा था कि पत्र लिखने के पीछे मेरी मंशा यही है कि कहीं मेरी यह इच्छाएं मन की मन में न रह जाएं और यह मेरे जीवन काल में कार्यान्वित न हो तो इसका पता भी मेरे पीछे किसी को न हो।