देश की जरूरत और संसाधन उपलब्धता के अनुसार होगा रिसर्च
निदेशक प्रो. पात्रा ने बताया कि डीआरडीओ चीफ डॉ. समीर वी कॉमथ ने कहा है कि जल्द ही डीआरडीओ प्रतिनिधि संस्थान का दौरा करेंगे। रक्षा क्षेत्र में जो भी समस्याएं और चुनौतियां आ रही हैं, उनको आईआईटी-बीएचयू के वैज्ञानिकों से बातचीत कर सुलझा लिया जाएगा।
देश की जरूरतों और संसाधनों की उपलब्धता के अनुसार प्रोजेक्ट को अपडेट भी किया जाएगा। निदेशक प्रो. पात्रा ने दिल्ली में हुए कार्यक्रम में कहा कि किसी भी रिसर्च को व्यवसायिक तौर पर सफल बनाना है तो उसकी पूरी साइकिल को समझकर काम करना होगा। अन्यथा आप ऐसे तो रिसर्च पेपर छाप लो, मगर वो देश के लिए कोई काम नहीं आने वाला।
दुश्मनों के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को कर सकता है डिसेबल
आईआईटी-बीएचयू में पाउडर मैटलर्जी, इलेक्ट्रॉनिक एंड फंग्शनल मटेरियल और हाई पावर माइक्रोवेव सोर्सेज एंड डिवाइस को विकसित किया जा रहा है। माइक्रोवेव सोर्सेज एंड डिवाइस अमेरिका में विकसित बोइंग चैंप मिसाइल सिस्टम और थॉर टेक्निकल हाई पावर ऑपरेशनल रिसपांडर तकनीक पर आधारित रक्षा उपकरण है। इसकी तरंगें दुश्मन देशों के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को तरंगों के जरिये डिसेबल कर सकता है। इसे मिलिट्री वाहन के इंजन या फिर लैब में इंस्टॉल कर सकते हैं।