चीख-पुकार सुनकर नीचे अस्पताल के कर्मचारी ऊपर आए और सभी डॉ. पराग को लेकर बीएचयू स्थित ट्रॉमा सेंटर भागे। यहां पहुंचते ही चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। सूचना पाकर भेलूपुर थाने की पुलिस बीएचयू पहुंची और परिजनों से घटनाक्रम के बारे में जानकारी ली।
शांत रहने वाली कॉलोनी में हुई घटना
सोमवार तड़के फॉरेंसिक टीम और डीसीपी काशी अमित कुमार, एसीपी भेलूपुर प्रवीण कुमार सिंह ने घटनास्थल का मुआयना किया। फॉरेंसिक टीम ने पिस्टल और अन्य कई सामानों को मौके से जुटाया। शांत रहने वाली कैवल्यधाम कॉलोनी में रात के समय गोली की आवाज सुनकर कॉलोनी वासी भी वैभव अस्पताल पर इकट्ठा हो गए। आईएमए से जुड़े चिकित्सकों और अन्य परिचित भी बीएचूय स्थित ट्रॉमा सेंटर पहुंच गए।
मूलरूप से पक्के महाल के रहने वाले डॉ. पराग के पिता नेत्र सर्जन डॉ. आरएम वाजपेयी का चार माह पूर्व निधन हो गया था। वह पक्के महाल से कैवल्यधाम कॉलोनी में मकान बनवाकर शिफ्ट हो गए थे। डॉ. पराग की दो संतान में बड़ा पुत्र अर्जुन मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है। लॉकडाउन के बाद घर से ही ऑनलाइन क्लास कर रहा है।
छोटा बेटा वरुण डीपीएस में कक्षा 12वीं का छात्र है। डीसीपी काशी अमित कुमार ने बताया कि चिकित्सक के परिजनों और पत्नी से बातचीत किया गया। चिकित्सक को डायबिटीज बीमारी थी, इसे लेकर पत्नी काफी चिंतित रहती थी। खानपान पर अत्यधिक ध्यान देती थी। इसलिए जब अत्यधिक शराब डॉ. पराग ने पी तो पत्नी नाराज हो गई। इसे लेकर पत्नी और पत्नी के बीच नोकझोंक हुई थी। इसी में उन्होंने लाइसेंसी पिस्टल से कनपटी पर गोली मार आत्महत्या कर ली।
मृदुभाषी थे डॉ. पराग
डॉक्टर पराग को सुसाइड करने की जानकारी मिलने के बाद मौके पर पहुंचे हर लोग क्षुब्ध थे। उनके अस्पताल में काम करने वाले कर्मचारियों, परिचितों रिश्तेदार कोई यह मानने के लिए तैयार नहीं हो रहा था कि डॉ पराग ने ऐसा कदम उठाया। पराग हर परिस्थितियों में मुस्कुराते मिलते थे। घर में पैसे-रुपये किसी भी चीज की कोई कमी नहीं हैं।
भगवान कृष्णजी यह क्या हो गया
घटना के बाद उनकी पत्नी व बच्चे बेसुध हो गए। पराग भगवान कृष्ण के बड़े भक्त थे। घर के बाहर काफी पैसा खर्च कर राधा कृष्ण का मंदिर बनवाया था। भगवान आप उनको ऐसा कदम उठाने से नहीं रोक पाए। ऐसा क्यों हो गया। पत्नी यही कहते हुए बार-बार बेसुध हो जा रही थी।