वाराणसी में पुलिस और बदमाशों में मुठभेड़
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वाराणसी पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़ तो शहर में कई बार हुए। लेकिन हरहुआ में हुई इस मुठभेड़ ने पिछले एक दशक की पुलिसिंग की यादें ताजा कर दी। जब एसओजी प्रभारी गिरिजा शंकर त्रिपाठी ने डेढ़ लाख इनामी और पूर्वांचल में आतंक का दूसरा नाम कहे जाने वाले संतोष कुमार गुप्ता उर्फ किट्टू और संतोष सिंह को चार जून 2010 को चौकाघाट इलाके में मार गिराया था।
इसके बाद इनामी तो कई मारे गए लेकिन दो बदमाश एक साथ ढेर नहीं हुए थे। एक दशक के बाद सोमवार को बनारस में दो बदमाशों का एनकाउंटर हुआ। कमिश्नरेट पुलिस अधिकारियों के अनुसार एक साथ दो बदमाशों को मुठभेड़ में मार गिराए जाने की कार्रवाई से अपराधियों में खौफ पैदा होगा और पुलिसिया इकबाल बुलंद रहेगा।
दोनों तरफ से करीब 15 राउंड हुई फायरिंग
पुलिस का दावा है कि घेराबंदी के दौरान पहली गोली बदमाशों की ओर चली। ताबड़तोड़ लगभग 15 राउंड फायरिंग हुई होगी। हरहुआ इलाका थर्रा उठा था। इस तरह की फायरिंग दस साल पूर्व किट्टू के एनकाउंटर के समय हुई थी। तब पुलिस ने चारों तरफ से बदमाशों को घेर लिया था।
जुर्म, जरायम से वास्ता रखने वालों को उनके अंजाम तक पुलिस पहुंचा रही है। बड़े अपराधियों की बात करें तो इससे पहले 21 मार्च 2022 को यूपी एसटीएफ ने लोहता क्षेत्र में दो लाख के इनामी बदमाश मनीष सिंह उर्फ सोनू को मुठभेड़ में मार गिराया था। नरोत्तम पुर निवासी मनीष उर्फ सोनू के ऊपर 36 आपराधिक मुकदमे दर्ज थे।