मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद इस मामले का संज्ञान लिया था। ठेकेदार ओम प्रकाश पांडेय के खिलाफ रामनगर थाने में एफआईआर दर्ज की गई। इसके बाद कुछ अफसरों का निलंबन हुआ तो कुछ को यहां से हटाकर दूसरे जगह संबद्ध कर दिया गया। घाट निर्माण में लगी सामग्री की गुणवत्ता जांच के लिए एकत्र किए गए सैम्पल आईआईटी बीएचयू भेजे गए जिसकी रिपोर्ट अभी आनी बाकी है।
घाट पर दो गोल आकार के गुंबद, दो चेंजिग रूम तथा एक पालकी निर्मित की गई थी। इन सभी के निर्माण में तकनीकी कमियों को समिति ने उजागर किया था। इसके बाद दोनों गोलाकार गुंबदों, पालकी को पहले लाल फीते से बाद में बांस बल्लियों से घेर दिया गया ताकि फिर कोई हादसा न हो। सभी स्ट्रकचरों की जांच के बाद पुनः निर्माण कराए जाने की बात कही गई।