ज्योति पर्व दीपावली पर इस बार दीपमालाओं, लड़ियों, रंगोलियों और अल्पनाओं से महालक्ष्मी की पूजा फलदायी होगी। गुरुवार के दिन दीपावली हर आमोखास के लिए धनवर्षा का योग लेकर आएगी। इस दिन लक्ष्मी, गणेश, कुबेर को प्रसन्न किया जाएगा। व्यापार जगत के लिए वृद्धि के योग हैं। सविधि पूजन से लक्ष्मी स्थिर भाव में आएंगी। इस दिन महालक्ष्मी पूजा के तीन मुहूर्त हैं।
पौराणिक मान्यता के अनुसार लंका विजय के बाद भगवान राम के अयोध्या आने पर आमावस्या की घोर अंधकार वाली रात को दीपों की लड़ियां सजाकर दीपावली मनाई गई थी। छोटी दीपावली 18 अक्तूबर को नरक चतुर्दशी को मनेगी।
शाम को मेष लग्न में हनुमान जयंती मनाई जाएगी। संकट मोचन समेत शहर के अन्य हनुमान मंदिरों में फूलों,हरी पत्तियों से शृंगार किया जाएगा। 19 अक्तूबर को दीपावली मनेगी। इस रात को कालरात्रि के रूप में महानिशा पूजा सबसे खास होगी।
मंत्रों की सिद्धियां के लिए साधक जतन करेंगे। मणिकर्णिका महाश्मशान, हरिश्चंद्र घाट के अलावा देवनाथपुरा में शव शिवा काली और काली बाड़ी मंदिरों में रात्रि जागरण कर तांत्रिक विधि से पूजा की जाएगी। घर-आंगन में महालक्ष्मी के आगमन मार्ग पर रंगोलियां सजाई जाएंगी।
दीपमालाएं सजाकर हर तरफ उजाला किया जाएगा। हस्त नक्षत्र और वैधृति योग में दीपावली में लक्ष्मी को स्थिर भाव में रखने के लिए पूजा की जाएगी। महावीर पंचांग के संपादक रामेश्वर नाथ ओझा के अनुसार आमावस्या की रात पुण्यतमा होगी।
इस बार गुरुवार को दीपावली व्यापार जगत के लिए खास होगी।भोर में सूप से दरिद्र नारायण का खेदन कर लक्ष्मी का आगमन कराया जाएगा।
दीपावली पर लक्ष्मी पूजा के मुहूर्त
दिन में 2:17 से 3:48 बजे तक स्थिर कुंभ लग्न में
शाम प्रदोष काल में 6:55 बजे से रात 8:52 बजे तक स्थिर वृष लग्न में
महानिशा पूजा: तांत्रिक विधि से रात 1:23 से भोर 3:37 बजे तक स्थिर सिंह लग्न में