बीएचयू में ‘भारतीय ज्ञान परंपरा एवं पं. दीनदयाल उपाध्याय के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विचार व्
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बीएचयू के भारत अध्ययन केंद्र में सोमवार को हुई कार्यशाला में भारत अध्ययन की परंपरा पर विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों और प्रतिभागियों को इसकी महत्ता बताई। बतौर मुख्य वक्ता नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सिद्धार्थ सिंह ने कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा को समझने के लिए विषय और अनुशासन के बीच संवाद-समन्वय का होना बहुत जरूरी है।
भारत अध्ययन केंद्र एवं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के तत्वावधान में 10 से 31 अगस्त तक चलने वाली कार्यशाला में भारतीय ज्ञान परंपरा, दर्शन, साहित्य, कला, लोक परंपरा, संस्कृति, संस्थाओं, भारतीय मेधा के विभिन्न आयामों पर समग्र अध्ययन होगा। नव नालंदा महाविहार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सिद्धार्थ सिंह, ने कहा कि भारत की परंपराओं, संस्थाओं और व्यक्तियों के योगदान, भारतीय दर्शन को विश्व के सामने प्रस्तुत करने में भारत अध्ययन की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि भारत अध्ययन अपने आप में अत्यंत व्यापक विषय है, जिसमें भारतीय ज्ञान-संपदा के विराट पक्षों को समाहित करने का प्रयास किया जाता है।
बीएचयू कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने भारत अध्ययन से जुड़े केंद्रों और संस्थाओं को मिलकर नई दिशा और दशा देने की आवश्यकता बताई। कहा कि ऐसे केंद्रों का संचालन इस प्रकार होना चाहिए कि उनसे समाज और अकादमिक जगत को नई रोशनी और नए ज्ञान की प्राप्ति हो।कला संकाय की संकाय प्रमुख प्रो. सुषमा घिल्डियाल ने कहा कि भारत अध्ययन का कार्य एकला चलो का नहीं बल्कि सभी को साथ लेकर आगे बढ़ने का कार्य है। स्वागत भारत अध्ययन केंद्र के समन्वयक प्रो. शरदिंदु कुमार तिवारी, धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अभिजीत दीक्षित ने किया। कार्यशाला में 123 प्रतिभागी शामिल होंगे। इनमें 45 प्रतिभागी ऑनलाइन और अन्य ऑफलाइन माध्यम से सहभागिता करेंगे।