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रामनगर की रामलीला: पांचवें दिन धनुष यज्ञ, लीला झांकी देखने उमड़ी भीड़; मंत्रमुग्ध हुए दर्शक

Sun, 22 Sep 2024 06:15 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

रामनगर की रामलीला के पांचवें दिन धनुष यज्ञ का आयोजन हुई। इस दौरान लीला झांकी देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ी। जब कोई भी राजा शिव का धनुष तोड़ना तो दूर हिला भी न सका तब राजा जनक विचलित हो गये और कह उठे लगता है कि धरती वीरों से खाली है तो ऐसी प्रतिज्ञा ही नहीं करते।
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रामनगर की रामलीला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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लेत चढ़ावत खैंचत गाढ़ें, काहुं न लखा देख सबु ठाढ़ें। तेहि छन राम मध्य धनु तोरा, भरे भुवन धुनि घोर कठोरा... अर्थात लेते, चढ़ाते और जोर से खींचते हुए किसी ने नहीं लखा (अर्थात ये तीनों काम इतनी फुर्ती से हुए कि धनुष को कब उठाया, कब चढ़ाया और कब खींचा, इसका किसी को पता नहीं लगा), सबने श्रीरामजी को (धनुष खींचे) खड़े देखा। उसी क्षण श्री रामजी ने धनुष को बीच से तोड़ डाला। भयंकर कठोर ध्वनि से लोक भर गए।

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शनिवार को रामनगर की रामलीला के पांचवें दिन धनुष यज्ञ लीला देखने के लिए जनता की भीड़ उमड़ पड़ी। जब कोई भी राजा शिव का धनुष तोड़ना तो दूर हिला भी न सका तब राजा जनक विचलित हो गये और कह उठे लगता है कि धरती वीरों से खाली है तो ऐसी प्रतिज्ञा ही नहीं करते। जनक के इस कटु वचन को सुनकर लक्ष्मण क्रोधित हो उठते हैं। उनको क्रोधित देखकर मुनि विश्वामित्र राम को धनुष तोड़ने का संकेत देते हैं। गुरु की आज्ञा पाकर उन्हें मन ही मन प्रणाम करके राम धनुष को उठा लेते हैं और पल भर में उसकी डोरी खींचकर उसे तोड़ देते हैं।

जनक की चिंता दूर हो जाती है। सीता सखियों के साथ जाकर राम के गले में जयमाल डाल देती हैं। इधर शिव धनुष टूटने का समाचार पाकर परशुराम क्रोध से व्याकुल होकर जनक के पास पहुंचते हैं और उन्हें भला-बुरा कहने लगते हैं। यह देखकर लक्ष्मण उनसे उलझ जाते हैं और कठोर वाणी बोलने लगते हैं। जिस पर राम हस्तक्षेप करते हैं और उनके क्रोध को शांत करते हैं। परशुराम अपना धनुष देकर उसकी प्रत्यंचा चढ़ाने को कहते हैं। राम के ऐसा करते ही परशुराम को विश्वास हो जाता है कि राम के रूप में पृथ्वी पर भगवान का अवतार हो चुका है। वह राम की जय जयकार करते हुए उनसे क्षमा मांगकर लौट जाते हैं।
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इधर भगवान सूर्य के रथ के घोड़ों ने धनुष टूटने की गर्जना सुन दक्षिणायन की ओर जा रही अपनी दिशा बदलकर उत्तरायण की और मुंह कर लिया। सूर्य के उत्तरायण जाते ही राम-सीता विवाह के मंगल कार्य शुरू हुए। सीता ने श्रीराम के गले में वरमाला डाल दी। आकाश में देवगणों ने पुष्प वर्षा कर अलौकिक क्षण का आनंद उठाया। विश्वामित्र की आज्ञा से जनक अपने दूत से राजा दशरथ को बरात लेकर आने का निमंत्रण भेजते हैं। जनकपुर में राम और सीता के विवाह की तैयारी शुरू हो जाती है। यहीं पर आरती के बाद लीला को विश्राम दिया जाता है।

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कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और विधायक सौरभ भी पहुंचे धनुष यज्ञ देखने

नगर में हो रहे विश्व प्रसिद्ध रामलीला के पांचवें दिन धनुष यज्ञ की रामलीला देखने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय व भाजपा कैंट विधायक सौरभ श्रीवास्तव भी पहुंचे। दोनों नेता कुछ समय के अंतराल पर अपने समर्थकों संग रामलीला देखने पहुंचे थे।

धनुषयज्ञ लीला देखने पहुंचे 40 हजार से अधिक श्रद्धालु
शाम के साढ़े छह बज रहे थे। जनकपुर जाने वाले हर रास्ते पर चहलकदमी थी। हर किसी में जनकपुर पहुंचकर जगह लेने की होड़ मची थी। शाम सात बजते बजते पूरा जनकपुर लोगों से भर गया। अंदर बाहर मिलाकर लगभग चालीस हजार से ज्यादा लीलाप्रेमी पहुंचे थे, अब सबकी निगाहें उस मंच पर टिकीं जहां श्रीराम मुनि विश्वामित्र के साथ बैठे हुए थे।

गर्जना के लिए हुआ तोप का इस्तेमाल
रामचरित मानस में इस बात का जिक्र है कि जब श्रीराम ने शिव धनुष तोड़ा था तो भयंकर गर्जना हुई थी। रामनगर की रामलीला में इसे भी दर्शाया जाता है। इसके लिए तोप का इस्तेमाल किया जाता है। यह तोप 36वीं वाहिनी पीएसी परिसर में रखी रहती है। धनुष टूटने और तोप छूटने का समय सही रहे इसके लिए भी व्यवस्था की जाती है। जनकपुर के एक बुर्ज पर मशालची खड़ा होता है। जब श्रीराम धनुष को झटका देते हैं ठीक उसी पल मशालची इशारा कर देता है और तोपची तोप दाग देता है।

शिवपुर में अहिल्या उद्धार, टूड़ीनगर में धनुषयज्ञ
शिवपुर/चिरईगांव। श्रीरामलीला समिति शिवपुर की ओर से चल रही रामलीला में शनिवार को अहिल्या तरण, श्री गंगा जी का दर्शन, जनकपुर विश्राम की लीला का मंचन हुआ। चिरईगांव जाल्हूपुर बाजार के टूड़ी नगर की प्राचीन रामलीला में शनिवार को धनुषयज्ञ का आयोजन किया गया। इसी के साथ श्रीराम लक्ष्मण की आरती उतारी जाती है और रामलीला को विराम दिया जाता है।
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