भगवान धनवंतरि की प्रतिमा
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पं. रामकुमार शास्त्री ने बताया कि काशी हीं नहीं पूरे भारत में एक मात्र अष्ट धातु के भगवान धन्वंतरि की मूर्ति सुड़िया स्थित धन्वंतरि निवास में राजवैद्य स्व. पंडित शिव कुमार शास्त्री के आवास में विराजमान है। प्रतिमा 325 साल पुरानी है और इसके ऊपर चांदी का छत्र मौजूद है। भगवान चांदी के सिंहासन पर विराजमान हैं और उनके चारों हाथों में अमृत का कलश, चक्र, शंख और जोंक सुशोभित हैं।
उनको विशिष्ट चमत्कारी औषधियों जैसे रस , स्वर्ण , हीरा , माणिक , पन्ना , मोती तथा जड़ीबूटियों में केशर , कस्तूरी, अंबर, अश्वगंधा, अमृता, शंखपुष्पी, मूसली आदि का विशेष भोग लगाया लगाया जाता है। भगवान के अगल बगल लगाने के लिए विशेष सुगंधित प्रभावकारी विशेष फूल हिमालय से मंगवाए जाते हैं।
मान्यता है कि प्रभु धनवंतरि के दर्शन से वर्ष भर परिवार में रोग-व्याधि नहीं होती है। श्रीमद्भागवत में उल्लेख है कि विष्णु के 24 अवतारों में धनवंतरि भी एक थे। वह सीधे समुद्र से हाथ में अमृत कलश लेकर प्रगट हुए थे। यह काल दोपहर का था ऐसे में पूजन इस बेला में ही किया जाता है।