मुकदमे की विवेचना के दौरान वादी को मुजफ्फरनगर स्थित घर जाना पड़ा तो उसने लाइन बाजार थानाध्यक्ष से सुरक्षा मांगी थी। इस पर एक सिपाही की ड्यूटी लगी और उसने अपनी निगरानी में वादी को उसके घर तक पहुंचाया। अभियोजन ने 3 मिनट 28 सेकेंड की ऑडियो क्लिप के माध्यम से साबित किया कि अपहरण और रंगदारी मांगे जाने की वारदात के बाद जब वादी धनंजय सिंह के घर से निकला तो उसने फोन कर विस्तार से पूरी बात अपने एमडी को बताई।
इन्हीं आधारों पर अदालत ने कहा कि जो मुकदमा दर्ज कराया गया है, उसमें पर्याप्त दस्तावेजी साक्ष्य पत्रावली पर उपलब्ध हैं। वादी के मुकरने के बाद दिए गए कथन के संबंध में कोई साक्ष्य पत्रावली पर मौजूद नहीं हैं। इसलिए अभियुक्तों को वादी के मुकरने का कोई लाभ नहीं मिलेगा। वादी को यदि अभियुक्तों से कोई डर या परेशानी नहीं थी तो उसके द्वारा घटना के तुरंत बाद क्यों अपने उच्च अधिकारियों को फोन किया गया और एसपी से मुलाकात की गई। थाने जाकर क्यों स्वलिखित तहरीर दी गई। इसलिए मामला पूर्ण रूप से अभियुक्तों के विरुद्ध साबित है।