देवशयनी एकादशी के साथ आज से चातुर्मास की शुरुआत हो जाएगी। भगवान विष्णु के विश्राम के कारण आषाढ़ शुक्ल पक्ष एकादशी से देवोत्थान एकादशी तक सभी मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा। अधिमास के कारण इस बार चातुर्मास की अवधि चार के बजाय पांच महीने की हो जाएगी। चातुर्मास के दौरान काशी प्रवास के लिए मठ-मंदिरों में साधु-संन्यासियों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है।
देवशयनी एकादशी के साथ ही चातुर्मास के अनुष्ठान भी काशी में आरंभ हो जाएंगे। सारनाथ से लेकर सामनेघाट के बीच में पड़ने वाले मठ-मंदिरों में चातुर्मास के लिए काशी पहुंचने वालों का सिलसिला शुरू हो गया है। साधु-संन्यासी और साधक इस अवधि में एक स्थान पर रहकर भगवान की पूजा, अनुष्ठान और ध्यान करते हैं। सारनाथ के बौद्ध मंदिरों में भी गया से बौद्ध भिक्षुओं का दल पहुंच रहा है। वहीं जैन मंदिरों में भी जैन साधुओं का दल पहुंचेगा। दिगंबर जैन मंदिर के राजेश जैन ने बताया कि चातुर्मास के दौरान जैन साधुओं का आगमन होगा।
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कांची कामकोटि पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य शंकर विजयेंद्र सरस्वती महाराज भी चातुर्मास व्रत महोत्सव के लिए काशी पधार रहे हैं। शंकराचार्य पांच जुलाई को बनारस पहुंचेंगे। उनके आगमन के दौरान महमूरगंज से मठ तक शोभायात्रा निकलेगी। शोभायात्रा की तैयारियों के लिए शहर भर के मठ-मंदिरों के साथ ही दक्षिण भारतीय समुदाय भी जुटा हुआ है।
काशी विद्वत कर्मकांड परिषद के अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी ने बताया कि 29 जून को अर्द्धरात्रि के बाद 2:43 बजे तक देवशयनी एकादशी रहेगी। देवशयनी एकादशी का व्रत 29 जून यानी बृहस्पतिवार को रखा जाएगा। इसके साथ ही चातुर्मास के यम-नियम और संयम व व्रत आरंभ हो जाएंगे। कार्तिक शुक्ल पक्ष की देव प्रबोधिनी एकादशी 23 नवंबर तक रहेगी। इस बार श्रावण मास दो माह का होने के कारण चातुर्मास की अवधि चार माह के बजाय पांच माह की रहेगी। इन पांच महीनों में मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा, जबकि धार्मिक अनुष्ठान विधि-विधानपूर्वक परंपरा के अनुसार संपन्न होंगे।