फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विश्वनाथ धाम में विदेशी भी: दो साल में काशी पहुंचे 139 देशों के भक्त, घूमने ही नहीं जीने आते हैं यहां

Fri, 17 May 2024 03:50 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी

सार

काशी विश्वनाथ में भारत से ही नहीं विदेशों से भी सैलानी आते हैं। कहते हैं कि यहां लोग काशी घूमने ही नहीं जीने भी आते हैं। पिछले दो साल में 139 देशों के भक्तों ने बाबा के दरबार में हाजिरी लगाई है। 
विज्ञापन
श्री काशी विश्वनाथ धाम - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

विदेशी सैलानी काशी के मंदिरों, धरोहर और संस्कृति को देखने ही नहीं आते, बल्कि काशी को जीने भी आते हैं। स्वर्णमयी काशी विश्वनाथ धाम का आकर्षण सात समंदर पार के सनातन धर्मियों में भी है। यही कारण है कि पिछले दो साल में 139 देशों के शिवभक्तों ने बाबा के दरबार में दर्शन-पूजन किया है।

विज्ञापन


धर्म, अध्यात्म और संस्कृति को जानने के लिए सात समंदर पार से काशी आने वाले विदेशी पर्यटकों का सिलसिला लंबे समय से बना हुआ है। नव्य भव्य श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के विस्तारित होने के बाद धाम में आने वाले श्रद्धालुओं के देशों के भक्तों की संख्या बढ़ गई है। बड़ी संख्या में सैलानी श्री काशी विश्वनाथ के दर्शन करने भी बनारस पहुंच रहे हैं। 

मंदिर न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्र ने बताया कि धाम के लोकार्पण के बाद लगभग 25 महीनों में बाबा के दरबार में 139 देशों के भक्तों ने हाजिरी लगाई है। वर्ष 2019 के मुकाबले वर्ष 2023 में केवल श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन करने वाले विदेशी सैलानियों की संख्या में ही चार गुने से भी अधिक की वृद्धि हुई है। 
विज्ञापन


घूमने ही नहीं, काशी को जीने आते हैं विदेशी
विदेशी सैलानी मंदिरों, धरोहर और संस्कृति को देखने ही नहीं आते, बल्कि काशी को जीने भी आते हैं। विदेशी पर्यटक हिंदी, संस्कृत, संगीत और मंत्रों को सीखने के लिए काशी में कई दिनों तक रहते भी हैं। काशी की दुनिया से अच्छी कनेक्टिविटी, सुरक्षा, मूल-भूत ढांचा में सुधार से बढ़ी सुविधाओं ने काशी में पर्यटकों का रुझान और बढ़ा दिया है। अनेक गैर सनातन मतावलंबी काशी आते हैं, परंतु मंदिर में दर्शन के लिए नहीं जाते हैं। बड़ी संख्या में सारनाथ होते हुए बौद्ध परिपथ के विदेशी पर्यटक, तंत्र, शाक्त, क्रिया योग, जैन, अघोरपंथ के बड़े आश्रमों एवं साधना स्थलों पर पहुंचते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें