Varanasi News: त्रयोदशी पर देवताओं ने अमृतपान किया था। पूर्णिमा तिथि को देवताओं को उनका साम्राज्य मिला था। इसलिए एकादशी से पांच दिनों यानी पूर्णिमा तक भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। इस व्रत को युधिष्ठिर और भगवान राम ने रखा था।
सनातन में वैशाख मास का विशेष महात्म्य है। इस महीने की मोहिनी एकादशी भी खास है। काफी वर्षों बाद इस बार पांच योग और हस्त नक्षत्र में बन रहा है। इस महासंयोग में भगवान श्रीहरि विष्णु का पूजन होगा। श्रद्धालु व्रत रखेंगे और प्रभु के मोहिनी रूप की पूजा करेंगे। विष्णु मंदिरों में शृंगार और पूजन होगा। खास ये है कि यह व्रत पांच दिनों तक चलता है। यानी एकादशी से लेकर पूर्णिमा तक व्रत रखने का विधान है। इस व्रत को रखने से सुख-समृद्धि के साथ ही पितृदोष से भी मुक्ति मिलती है।
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वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि मोहिनी एकादशी के नाम से जानी जाती है। इसका व्रत रखने से भगवान विष्णु के मोहिनी रूप की कृपा प्राप्त होती है। इस दिन श्रद्धालु सुबह संकल्प लेकर दिनभर व्रत रखेंगे। घरों व विष्णु मंदिरों में दर्शन पूजन करेंगे।
आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री ने बताया कि काफी सालों बाद मोहिनी एकादशी पर ययीजय योग, सवार्थसिद्ध, अमृत सिद्ध, मानस एवं वज्र योग बन रहा है। इस दिन भोग-विलास की भावना त्यागकर भगवान विष्णु का स्मरण करना चाहिए और गीता का पाठ करना चाहिए। मोहिनी एकादशी का व्रत रखने से गंभीर पाप से मुक्ति, मोह-माया के बंधन से मुक्त, विवाह बांधा, चंद्रदोष व पितृ दोष दूर हो जाते हैं।
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14:37 घंटे रहेगा हस्त नक्षत्र
ज्योतिषविद विमल जैन के अनुसार एकादशी तिथि 18 मई को सुबह 11:23 बजे से 19 मई को दोपहर 1:51 बजे तक रहेगी। मगर उदया तिथि में एकादशी मनाई जाएगी। जबकि हस्त नक्षत्र 18 मई को रात में 12:19 बजे से अगले दिन रात में 3:16 बजे तक रहेगा।
मोहिनी रूप धर अमृत से भटकाया था राक्षसों का ध्यान
स्कंद पुराण के अनुसार एकादशी के दिन ही समुद्र मंथन से अमृत प्रकट हुआ था। इसे लेने के लिए देवताओें और राक्षसों में विवाद उत्पन्न हो गया। देवताओं ने भगवान विष्णु से मदद मांगी। अमृत पात्र से राक्षसों का ध्यान भटकाने के लिए विष्णु जी ने मोहिनी नामक एक सुंदर महिला का रूप धरा।