एकादशी पर शेषशायी शृंगार, चतुर्दशी पर होगा हरिहर श्रृंगार
मंदिर के प्रधान पुजारी आचार्य मुरलीधर गणेश पटवर्धन ने बताया कि शृंगार आरती का भव्य आयोजन एक मास तक शरद पूर्णिमा से कार्तिक पूर्णिमा तक होता है। रोजाना विविध शृंगार के साथ देवोत्थानी एकादशी को भगवान बिंदुमाधव का शेषशायी शृंगार होता है। भगवान चातुर्मास के बाद द्वादशी को उठते हैं।
द्वादशी को तुलसी विवाह के साथ घोड़े पर, त्रयोदशी को झूले पर शृंगार एवं बैकुंठ चतुर्दशी को हरिहर शृंगार होता है। पूर्णिमा को भगवान का पंचामृत स्नान दोपहर 12 बजे होता है। हाथी पर श्रृंगार के साथ छप्पन भोग अन्नकूट का भोग लगता है। शाम को छह बजे भगवान के उत्सव विग्रह को पालकी पर बैठाकर शहर में भ्रमण कराया जाता है।