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देव दीपावली: आज काशी में उतरेगा देवलोक, सीएम योगी घाटों पर निहारेंगे अद्भुत और अलौकिक छटा

Fri, 23 Nov 2018 09:51 AM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
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देव दीपावली 2018
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 कार्तिक पूर्णिमा पर आयोजित होने वाली देव दीपावली पर काशी का वातावरण अद्भुत एवं अलौकिक होता है। शुक्रवार को पर्व को भव्य रूप से मनाने के लिए घाटों से लेकर शहर में तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गईं हैं। जगह-जगह फूलमालाओं और झालरों से सजावट का काम अंतिम दौर में है।


गंगातट पर उतरे देवलोक की छवि जैसी है काशी की देव दीपावली। दिवाली के 15 दिन बाद कार्तिक पूर्णिमा को काशी में गंगा के अर्धचंद्राकार घाटों पर दीपों का अद्भुत जगमग प्रकाश 'देवलोक' जैसे वातावरण की सृष्टि करता है। पिछले 10-12 सालों में ही पूरे देश और विदेशों में आकर्षण का केंद्र बन चुका देव दीपावली महोत्सव 'देश की सांस्कृतिक राजधानी' काशी की संस्कृति की पहचान बन चुका है। 
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करीब तीन किलोमीटर में फैले अर्धचंद्राकार घाटों पर जगमगाते लाखों-लाख दीप, गंगा की धारा में इठलाते-बहते दीप, एक अलौकिक दृश्य की सृष्टि करते हैं। शाम होते ही सभी घाट दीपों की रोशनी में नहा-जगमगा उठते हैं। इस दृश्य को आंखों में समा लेने के लिए लाखों देशी-विदेशी अतिथि घाटों पर उमड़ पड़ते हैं। 


देव दीपावली के आयोजन का शुभारंभ राज्यपाल राम नाईक और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मौजूद राजघाट से करेंगे। राजघाट पर आयोजन के बाद राज्यपाल और मुख्यमंत्री नौका विहार करते हुए अस्सी घाट पर देव दीपावली की छटा निहारेंगे। शासन की ओर से पहली बार 50 लाख रुपये का बजट जारी किया गया है। 

अकेले काशी में मनाई जाने वाली देव दीपावली में देश-विदेश से कई लाख लोग आते हैं। आयोजन की तैयारियां कई माह पूर्व शुरू हो जाती हैं लेकिन एक दिन पहले तैयारियां दिन-रात की जा रही हैं। पुलिस की ओर बैरिकेडिंग करा दी गई है। पहली बार काशी के 84 घाटों पर अलग अलग आयोजन की तैयारी है।

1986 में पूर्व काशी नरेश स्व. डॉ. विभूति नारायण सिंह ने पंचगंगा पर हजारा दीप जलाकर देव दीपावली की शुरुआत कराई थी। प्राचीन दशाश्वमेध घाट पर सबसे पहले आरती की शुरुआत 1991 से हुई है। 14 नवंबर, 1997 से गंगा आरती प्रतिदिन की जाने लगी।

इसलिए मनाई जाती है देव दीपावली

काशी में देव दीपावली की शुरुआत पुरातन काल से मानी जाती है। देव दीपावली का उल्लेख निर्णय सिंधु और स्मृति कौस्तुभी में भी है। संतों-विद्वानों के कथनानुसार काशी के प्रथम शासक दिवोदास ने राज्य में देवी-देवताओं का प्रवेश बंद कर दिया था। छिपे रूप में देवगण कार्तिक मास में पंचगंगा घाट पर गंगा में स्नान के लिए आते थे। बाद में यह प्रतिबंध हट गया।

इसे हर्षोल्लास से मनाने के लिए सभी देवी-देवता बनारस में दीपमालाओं से सुसज्जित भगवान शिव की महाआरती के लिए कार्तिक पूर्णिमा के दिन पधारे थे। मान्यता है कि तभी से देव दीपावली मनाई जाने लगी। वहीं दूसरी मान्यता के अनुसार त्रिपुर नामक दैत्य पर विजय के पश्चात देवताओं ने कार्तिक पूर्णिमा के दिन अपने सेनापति कार्तिकेय के साथ शंकर की महाआरती और नगर को दीपमालाओं से सजाकर विजय दिवस मनाया था।

1986 में पूर्व काशी नरेश स्व. डॉ. विभूति नारायण सिंह ने पंचगंगा पर हजारा दीप जलाकर देव दीपावली की शुरुआत कराई थी। प्राचीन दशाश्वमेध घाट पर सबसे पहले आरती की शुरुआत 1991 से हुई है। 14 नवंबर, 1997 से गंगा आरती प्रतिदिन की जाने लगी।
 

भव्य आरती संग सजेगी भजनों की सुर गंगा

 गंगोत्री सेवा समिति के संस्थापक अध्यक्ष पं. किशोरी रमन दूबे ने बताया कि इस बार देव दीपावली का 28वां वर्ष है। देव दीपावली पर भव्य आरती के साथ भजनों की सुर गंगा से देव दीपावली की संध्या सजेगी। मां गंगा की अष्टधातु की 108 किलो की प्रतिमा का फूलों से अलौकिक शृंगार होगा। इसके लिए कोलकाता से 100 किलो देशी-विदेशी फूल मंगाए गए हैं।

बुधवार को प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत मंगला चरण के साथ शास्त्रोक्त विधि से पूजन के बाद 51 लीटर गाय के दूध से मां गंगा का अभिषेक होगा। प्राचीन दशाश्वमेध घाट की पवित्र सीढ़ियों और मढ़ियों पर 21 ब्राह्मणों द्वारा गंगा महाआरती की जाएगी।

आयोजन की मुख्य अतिथि प्रदेश पर्यटन मंत्री रीता बहुगुणा जोशी और अध्यक्षता नासिक के कैलाश मठ के स्वामी संविदानंद सरस्वती करेंगे। कर्नाटक राज्य की सुप्रसिद्ध गायिका संगीता कट्टी कुलकर्णी के साथ काशी के गायक विजय वशिष्ठ होंगे।
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कल मैदागिन से गोदौलिया तक नो व्हीकल जोन

देव दीपावली पर शुक्रवार को मैदागिन से गोदौलिया होते हुए सोनारपुरा, रामापुरा और बेनियाबाग क्षेत्र नो व्हीकल जोन रहेगा। इसके साथ ही भदऊं चुंगी से भैंसासुर घाट, अस्सी घाट से अग्रवाल तिराहा और अस्सी घाट से लंका स्थित बैंक आफ बड़ौदा तिराहा के बीच भी वाहन नहीं चलेंगे। एसपी ट्रैफिक सुरेश चंद्र रावत ने बुधवार को बताया कि राजघाट पुल से आने वाले वाहनों को राजघाट पुलिस पिकेट से मोड़कर बसंता डिग्री कॉलेज के मैदान में खड़ा कराया जाएगा।

गोलगड्डा, कज्जाकपुरा की तरफ से भदऊं चुंगी की तरफ  आने वाले वाहनों को भदऊं रेलवे कॉलोनी के खाली स्थान, कज्जाकपुरा के पास स्थित संक्रामक रोग अस्पताल परिसर और नेशनल इंटर कॉलेज आदमपुर के मैदान में खड़ा कराया जाएगा। विशेश्वरगंज से मच्छोदरी होकर भैंसासुर घाट की तरफ  जाने वाले वाहनों को मच्छोदरी पार्क में खड़ा कराया जाएगा। लहुराबीर से मैदागिन होते हुए गोदौलिया की तरफ  जाने वाले वाहनों को टाउनहाल परिसर में खड़ा कराया जाएगा। 

लहुराबीर से बेनिया होते हुए रामापुरा की तरफ  जाने वाले वाहनों को बेनियाबाग पर रोक कर उन्हें बेनियाबाग पार्क, क्वींस कॉलेज मैदान और संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर में खड़ा कराया जाएगा। लहुराबीर से गोदौलिया की तरफ  जाने वाले प्रशासनिक अधिकारियों के वाहनों को लक्सा पर रोककर उनकी पार्किंग सनातन धर्म इंटर कॉलेज मैदान में खड़ा कराया जाएगा। गुरुबाग से लक्सा होकर रामापुरा की तरफ जाने वाले वाहनों को लक्सा पर रोक कर उनकी पार्किंग मजदा सिनेमा मैदान, ईश्वर टॉवर के बेसमेंट, पीडीआर मॉल के बेसमेंट और जयनारायण इंटर कॉलेज के मैदान में खड़ा कराया जाएगा। 

एसपी ट्रैफिक ने बताया कि कमच्छा से थाना भेलूपुर होते हुए अस्सी घाट की तरफ  जाने वाले और ब्राडवे तिराहा से अस्सी घाट की तरफ  जाने वाले वाहनों को रोक कर उन्हें बाबा कीनाराम मंदिर के सामने से आचार्य रामचंद्र शुक्ल चौराहा तक सड़क के दोनों तरफ  और एग्लो बंगाली इंटर कालेज भेलूपुर के मैदान में खड़ा कराया जाएगा। बीएचयू के मालवीय गेट की तरफ  से आने वाले वाहनों को अस्सी तिराहे से आगे रोककर उन्हें अस्सी तिराहा से आगे काली मंदिर से दुर्गा कुंड रोड पर खड़ा कराया जाएगा।
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