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Varanasi News: अरावली का विनाश ईश्वर की कृति का अपमान, संरक्षण ही एकमात्र विकल्प

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जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अरावली बचाओ अभियान को अपना समर्थन दिया है। प्रकृति संरक्षण को सनातन धर्म का मूल बताते हुए इस मुहिम में जुटे समस्त समर्पित सदस्यों के पुरुषार्थ की सराहना की।
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रविवार को जारी आशीर्वाद संदेश में शंकराचार्य ने कहा कि अरावली पर्वत शृंखला केवल पत्थरों का ढेर नहीं, लेकिन उत्तर भारत की जीवन-रेखा और हमारी प्राचीन सभ्यता की जीवंत साक्षी है। उन्होंने चेतावनी दी कि पर्वतों का अनियंत्रित क्षरण और वनों का कटान सीधे तौर पर प्रकृति और ईश्वर की कृति का अपमान है। शंकराचार्य ने कहा कि हमारे वेदों और पुराणों में वृक्षों और पर्वतों को पुत्र के समान और पूजनीय माना गया है। मत्स्य पुराण का संदर्भ देते हुए बताया कि एक वृक्ष दस पुत्रों के समान पुण्यकारी है। अरावली का विनाश आने वाली पीढ़ियों के लिए भीषण जल संकट और मरुस्थलीकरण का कारण बनेगा।
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