टीबी मुक्त भारत बनाने के लिए सरकार के तमाम जागरुकता कार्यक्रमों के बावजूद जौनपुर जिले में टीबी रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। वर्ष 2018 की तुलना में इस वर्ष 467 नए मरीज चिह्नित हुए हैं। विभाग ने इनका पंजीकरण कर उपचार शुरू कर दिया है। टीबी के मामले बढ़ने के पीछे लोगों में सेहत के प्रति लापरवाही और जानकारी के अभाव को मुख्य कारण माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने भारत को वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त बनाने की प्रतिबद्धता जताई है। पिछले दिनों पूविवि के दीक्षांत समारोह में आई राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने भी टीबी को जड़ से मिटाने को प्राथमिकता में रखते हुए जनजागरण पर जोर दिया था। राष्ट्रीय क्षय नियंत्रण कार्यक्रम के तहत लगातार जागरुकता कार्यक्रम चलाए भी जा रहे हैं। डाट्स केंद्रों पर बेहतर-दवा उपचार की व्यवस्था की गई है।
बावजूद जिले में टीबी के मरीजों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2018 में टीबी के कुल 6486 मरीज थे, जो इस वर्ष बढ़कर 6953 हो गए हैं। वैसे विभाग इसके लिए अपनी कार्य कुशलता को जिम्मेदार मान रहा है। उनका कहना है कि विभिन्न चरणों में चलाए गए सक्रिय खोज अभियान के दौरान नए मरीजों को चिह्नित किया गया है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2017 में अभियान चलाकर 3728 लोगों के बलगम की जांच कराई गई। इसमें 117 लोग पॉजीटिव चिह्नित हुए। इसी प्रकार 2018 में 13970 लोगों के बलगम की जांच में 649 लोग चिह्नित हुए। वर्ष 2019 में 15224 लोगों के बलगम की जांच कराई गई। इसमें 424 लोग चिह्नित हुए। पुराने चिह्नित मरीजों के साथ फिलहाल जिले में टीबी पीड़ितों की संख्या 6953 हो गई है।
टीबी का सबसे प्रमुख लक्षण अधिक समय तक लगातार खांसी आना है। इसके अलावा रात में पसीना आना, अधिक समय तक बुखार रहना, थकावट महसूस होना, शरीर का वजन घटना, सांस लेने में परेशानी होना आदि टीबी के प्रमुख लक्षण हैं। इस तरह की शिकायत मिलने पर तत्काल जांच कराना चाहिए।
दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी आने पर डॉक्टर को जरूर दिखाएं। डाक्टर की सलाह पर दवा का पूरा कोर्स लें। कभी डॉक्टर से पूछे बिना दवा बंद नहीं करना चाहिए। आसपास के लोगों में यह बीमारी न फैले इसके लिए हमेशा मास्क पहनें या फिर खांसने और छींकने से पहले मुंह को कपड़े से ढक लें। मरीज किसी एक प्लास्टिक बैग में थूके और उसमें फिनाइल डालकर अच्छी तरह बंद कर डस्टबिन में डाल दें। मरीज हवादार और अच्छी रोशनी वाले कमरे में रहें। पौष्टिक खाना खाए, एक्सरसाइज और नियमित रूप से योग करें। बीड़ी, सिगरेट, हुक्का, तंबाकू, शराब आदि का सेबन नहीं करना चाहिए। भीड़ और गंदे स्थानो पर जाने से बचें। बच्चा पैदा होने के बाद उसे बीसीजी का टीका जरूर लगवाना चाहिए।
टीबी एक संक्रामक बीमारी है जो ट्यूबरक्यूलोसिस बैक्टीरिया के कारण होती है। सबसे अधिक प्रभाव फेफडों पर होता है। फेफड़ों के अलावा ब्रेन, यूटरस, मुंह, लिवर, किडनी, गले आदि में भी टीबी हो सकती है। समय से इलाज नहीं हो ने पर घातक हो जाती है। जिले में अभियान चलाकर मरीजों की तलाश कर इलाज किया जा रहा है। इलाज के लिए अस्पताल में सभी दवाएं उपलब्ध हैं।
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डॉ.आरके सिंह, जिला क्षय रोग अधिकारी जौनपुर