पूर्व कुलपति राजेंद्र मिश्र ने कहा कि भारत एक ऐसा देश है जिसके हाथ में पूरे विश्व की जानकारी है। हमारे ऋषियो ने अपने धर्म को सनातन धर्म कहा क्योंकि हमारी प्राचीन भाषा देव भाषा के रूप में है। आज फिर भारत को विश्व गुरु बनाने का समय आ गया है।
कुलपति प्रो. टीएन सिंह ने भारतीय परंपरा में आधुनिकता पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि हम सब आगे बढ़ना चाहते हैं तो हमें अपने मूल को समझना होगा और उसे लेकर निरन्तर आगे बढ़ना होगा। साथ ही कुलपति ने शिक्षा पर बजट की चर्चा करते हुए उसे बढ़ाने की भी बात कही। अतिथियों का स्वागत प्रो शैलेश मिश्र, संचालन डॉ प्रकाश उदय और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. आरपी सिंह ने किया।