पांडेयपुर में डॉक्टर्स कॉलोनी में खाली प्लाट में भरा पानी और लोहता में सड़क पर बह रहा पानी।
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खाली जमीन पर जमा पानी में पनपता है लार्वा
वैसे तो डेंगू का लार्वा एक ही जगह जमा पानी में पनपता है लेकिन शहर के जिन इलाकों को संवेदनशील सूची में रखा गया है, वहां सफाई व्यवस्था बेपटरी हो गई है। कहीं खाली जगह पर कूड़े का ढेर लगा है तो कुछ जगहों पर घर के सामने नाली का पानी सड़क पर बहता नजर आ रहा है। जिस तरह का दृश्य है, उसको देखकर यहीं लग रहा है कि लंबे समय से नगर निगम की टीम यहां आई ही नहीं है। डॉक्टर्स कालोनी जहां डॉक्टर रहते हैं, उसके पास ही खाली जमीन पर लंबे समय से पानी जमा है। यहां विकासनगर, टकटकपुर में जल निकासी की व्यवस्था ही नहीं है। लिहाजा यहां हर साल डेंगू के मरीज मिलते हैं। लोहता के धमरिया, अलावल मुहल्ले में तो हाल यह है कि घर से निकलने पर गेट पर ही पानी लंबे समय से जमा है। इसमें मच्छर का लार्वा भी पनप रहा है। ग्रामीण इलाकों में भी सफाई व्यवस्था बेपटरी हो गई हैं। इसमें आराजीलाइन ब्लॉक के मातलदेई चौराहे पर पंचक्रोशी परिक्रमा मार्ग पर ही पानी जमा है। चौबेपुर के परानापुर गांव, धौरहरा में भी मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है।
बारिश का मौसम 15 जून से ही माना जाता है। इस महीने में हालांकि बारिश कम ही होती है, इस वजह से डेंगू का प्रकोप जुलाई से दिसंबर तक सबसे अधिक माना जाता है। ये वो महीने हैं, जिसमें बारिश के बाद पानी जमा होने के साथ ही वातावरण में नमी अधिक होने की वजह से डेंगू को बढ़ावा देने वाले एडीज मच्छरों का प्रकोप अधिक रहता है। पिछले दो साल में अगर स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों की बात करें तो जुलाई से दिसंबर तक ही मरीज अधिक मिले हैं।
अधिकारी बोले
जो भी संवेदनशील वार्ड, मुहल्ले और गांव हैं, यहां अधिकांश जगहों पर खाली प्लाट है। इसमें बरसात के समय पानी जमा होने के साथ गंदगी भी रहती है। वार्डों में पिछले पांच वर्षों से हर साल 10 से अधिक मरीज मिल रहे हैं। एक अप्रैल से चलननेवाले संचारी अभियान में इन वार्डों और मोहल्लों में विशेष अभियान चलाकर सफाई कराया जाएगा। साथ ही नगर निगम की मदद से फॉगिंग भी होगी। -एससी पांडेय, जिला मलेरिया अधिकारी