इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने 27 मई 2026 को पदोन्नति समिति की दोबारा बैठक की। बैठक के बाद 22 जून को संशोधित पदोन्नति सूची जारी की गई। इसमें पहले पदोन्नत किए गए सामान्य और ओबीसी वर्ग के 39 नर्सिंग ऑफिसरों का प्रमोशन निरस्त कर उन्हें पूर्व पद पर भेज दिया गया। संशोधित सूची से प्रभावित नर्सिंग ऑफिसरों ने कुलपति, कुलसचिव और चिकित्सा अधीक्षक को पत्र लिखकर बिना किसी पूर्व सूचना के डिमोशन किए जाने को नियमविरुद्ध बताया है।
उनका कहना है कि 22 जून को जारी आदेश में भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के स्थापित नियमों और वैधानिक रोस्टर प्रणाली की अनदेखी की गई है। उन्होंने मांग की है कि जब तक इस पूरी प्रक्रिया की किसी उच्चस्तरीय निष्पक्ष समिति से जांच नहीं हो जाती, तब तक वर्तमान पदोन्नति सूची के क्रियान्वयन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए।
नर्सिंग ऑफिसरों के प्रमोशन की पूरी प्रक्रिया विश्वविद्यालय के नियमानुसार की जाती है। किसका प्रमोशन हुआ है और कितने लोगों का डिमोशन किया गया है, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। यदि इस मामले में नर्सिंग ऑफिसरों की ओर से कोई प्रत्यावेदन मिलता है, तो अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक से बात कर नियमानुसार जो भी उचित होगा, वह कार्रवाई की जाएगी। - प्रो. एसएन संखवार, निदेशक, आईएमएस बीएचयू