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आरएसएस प्रमुख पर प्रोफेसर की टिप्पणी से बरेली कॉलेज में तोड़फोड़

Mon, 20 Mar 2017 03:29 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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बरेली कॉलेज में तोड़फोड़ - फोटो : amar ujala
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बरेली कॉलेज में चल रहे सेमिनार के दौरान बीएचयू के हिंदी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. चौथीराम यादव की संघ प्रमुख पर टिप्पणी ने बवाल करा दिया। सेमिनार का विषय था - ‘हिन्दी साहित्य के विकास में सूचना एवं तकनीकी के योगदान’।
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उन्होंने विषयांतर करते हुए पहले भाजपा नेताओं पर तीर चलाए और बाद में कह दिया कि मोहन भागवत आतंक को बढ़ावा दे रहे हैं। इस पर वहां मौजूद आगरा और मुरादाबाद के प्रोफेसरों ने विरोध कर दिया और मंच पर ही आने से इंकार कर दिया।

जानकारी पाकर एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने हंगामा करते हुए तोड़फोड़ कर दी। प्राचार्य व चीफ प्राक्टर को घेरकर धक्का-मुक्की की गई। चौथीराम को किसी तरह पिछले दरवाजे से निकाला गया। घंटों हंगामे के बाद प्रोफेसर के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया तब हंगामा शांत हुआ।
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इस बीच प्रो. चौथीराम ने कहा है कि उन्होंने आरएसएस प्रमुख का नाम जरूर लिया था लेकिन आतंकवाद से जोड़कर उन पर टिप्पणी नहीं की थी। कुछ लोगों ने उनके विचारों को तोड़-मरोड़ कर बवाल करा दिया।

 बरेली कॉलेज में रविवार को दोपहर करीब ढाई बजे उद्घाटन सत्र में ही काशी हिंदू विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त चौथीराम यादव ने पहले तो कुछ देर विषय पर बोला लेकिन बाद में उन्होंने कहा कि यह देश डिजिटलाइजेशन नहीं अंधकार युग में जा रहा है और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत जैसे लोग आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे हैं। इसी बात पर बवाल बढ़ा।

एबीवीपी से जुड़े छात्रों ने जमकर हंगामा किया। जानकारी पर एसपी सिटी समीर सौरभ समेत काफी पुलिस फोर्स कॉलेज में पहुंच गई। छात्रों ने आरोपी और सेमिनार संयोजकों पर रिपोर्ट दर्ज करने की मांग की। बाद में आयोजन सचिव डॉ. मीना यादव की ओर से आरोपी प्रोफेसर चौथीराम यादव के खिलाफ एसपी सिटी को तहरीर दी गई जिस पर मुकदमा दर्ज हुआ।

प्रो. चौथीराम ने कहा कि संघ की विचारधारा से जुड़े लोगों के इशारे पर वहां उपद्रव कराया गया। उद्घाटन सत्र के बाद दो और सत्र तोड़फोड़, हंगामे की वजह से नहीं कराए जा सके।

डॉ. चौथीराम ने अपने बयान में कहा है कि उन्होंने अपने वक्तव्य में कहीं भी मोहन भागवत को आतंकवादी नहीं कहा। अतिवाद की चर्चा किसी अन्य संदर्भ में हुई जिसका गलत आशय लिया गया। मोहन भागवत जी को आतंकवादी कहने का तो प्रश्न ही नहीं उठता।

फिर भी यदि मेरे कथन से किसी को ठेस पहुंची है तो मैं बिना शर्त माफी मांगता हूं। मैं व्यक्तिगत तौर पर भागवत जी और सभी माहपुरुषों, जन सेवकों का सम्मान करता हूं।
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