छात्रों की प्रमुख मांगों में मरीजों को समुचित और नियमित भोजन की व्यवस्था, रेडियोलॉजिकल व रक्त जांच रिपोर्ट की डिजिटल उपलब्धता, रेडियोलॉजिकल जांचों की प्रतीक्षा अवधि में कमी, जांच शुल्क में पारदर्शिता, आवश्यक दवाओं की वार्डों में उपलब्धता, ICU नीति में स्पष्टता, तथा बाहरी उपकरणों व दवाओं की अनिवार्यता समाप्त करना शामिल है।
सत्यनारायण सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय छात्र स्वास्थ्य संकुल की आपातकालीन सेवाएं, जो कोरोना काल से पहले रात आठ बजे तक चालू रहती थीं, अब तक बहाल नहीं हुई हैं। उन्होंने बताया कि हजारों छात्रों के लिए केवल छह इमरजेंसी बेड उपलब्ध हैं, जो अत्यंत निराशाजनक है।
दिव्यांश धर दुबे ने भी छात्रों को ओर से बात रखते हुए कहा कि सर सुंदरलाल अस्पताल की व्यवस्थाएं चरमरा चुकी हैं। प्रशासन भ्रष्टाचार का केंद्र बन चुका है।
छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाया और मेडिकल सुपरिंटेंडेंट को पद से नहीं हटाया गया, तो वे चरणबद्ध तरीके से उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। इस दौरान श्यामल, पल्लव, आशीर्वादम, यशवर्धन, दिव्यांशु, अंकित, आयुष और शिवम सोनकर आदि उपस्थित रहे।