फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

UP News: प्रेमचंद आवास को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग, जीवंत हुए पंच परमेश्वर के किरदार; जले 5100 दीप

Thu, 01 Aug 2024 01:13 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी

सार

Varanasi News: मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर बनारस के साहित्यकारों का जुटान हुआ। आयोजन के बाद तमाम संगठनों ने लमही स्थित कथा सम्राट के आवास को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग की। जयंती के दौरान विभिन्न कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।
विज्ञापन
लमही महोत्सव में मुंशी प्रेमचंद को श्रद्धा-सुमन अर्पित करते गणमान्य। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर उनके गांव लमही में उत्सवी रंग बिखरा। उत्सव मनाने के लिए गांव में मेले जैसा माहौल दिखा। बच्चे चहकते और महिलाएं व बुजुर्ग उत्साहित नजर आए। 

विज्ञापन


मुंशी जी के मंत्र, पंचपरमेश्वर, बूढ़ी काकी और हिंसा परमो धर्म: जैसी कहानियों का मंचन कर बच्चों और युवाओं ने उनके किरदार को जीवंत कर दिया। इस दौरान कभी ठहाके लगे तो कभी चेहरे पर समाज में व्याप्त जात-पात, मजहबी भेदभाव की पीड़ा नजर आई। शाम को स्मारक स्थल व पैतृक आवास को 5100 दीपों से रोशन किया गया।

संस्कृति विभाग की ओर से प्रेमचंद की स्मारक स्थली पर की गई तैयारी की कलई बारिश होते ही खुल गई। स्मारक स्थल से लेकर मुंशी जी के आवास में पानी घुस गया। उनकी गली में भी पानी भरा था। आनन-फानन में नगर निगम ने पानी निकलवाया। 

विज्ञापन

डेढ़ घंटे देर से शुरू हुआ लमही महोत्सव
इसके चलते लमही महोत्सव नौ बजे के बजाय डेढ़ घंटे देर यानी साढ़े दस बजे से शुरू हुआ। साहित्यकारों, कवियों और आमजनों ने प्रेचमंद की मूर्ति पर पुष्प चढ़ाकर नमन किया। यह सिलसिला देर शाम तक चला।

साहित्यकारों और कवियों ने कलम के जादूगर प्रेमचंद की महिमागान किया। कहा कि प्रेमचंद मजदूर, किसान, कामगार और नौजवान की आस थे। उन्होंने नारी मुक्ति के लिए लंबी लड़ाई लड़ी। सभी ने प्रेमचंद के स्मारक स्थल राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग की। 

इस दौरान साहित्यकारों ने प्रेमचंद पथ पत्रिका का विमोचन किया। जयशंकर जय के संचालन में डॉ. वेद प्रकाश पांडेय, टीकाराम शर्मा आचार्य, डॉ. एकता, डॉ. सुभाषचंद्र, विपिन कुमार, विश द्विवेदी, डॉ. नसीम, निशा, करुणा सिंह, कुंवर सिंह कुंवर, डॉ. चकाचौंध ज्ञानपुरी आदि कवियों ने काव्यपाठ किया। 

स्वागत महोत्सव के समन्वयक अमित द्विवेदी व संचालन डॉ. सुजीत चौबे व मीनाक्षी ने किया। उधर, प्रेमचंद स्मारक एवं विकासीय योजना समिति की ओर से भी मुंशी जी की जयंती मनाई गई।

लमही महोत्सव में नाटक का भावपूर्ण मंचन। - फोटो : अमर उजाला
इनकी रही मौजूदगी और इनका सम्मान
इस मौके पर प्रो. राम सुधार सिंह, ओम धीरज, हिमांशु उपाध्याय, कालिका सिंह, सुरेशचंद दुबे, डॉ. हरेंद्र नारायण सिंह, सभासद ज्ञानचंद पटेल, राजीव गौड़, आनंद कुमार पाल, अभिषेक सिंह, शैज खान, मनोज कुमार, शैलेश सिंह आदि रहे। 

साहित्यकार प्रो. सदानंद शाही, प्रो. वशिष्ठ अनूप, दुर्गा श्रीवास्तव, दयानिधि मिश्र, प्रो. प्रीति जायसवाल, डॉ. मनोज श्रीवास्तव, प्रो. अनुराग कुमार, दूरदर्शन वाराणसी के निदेशक राजेश कुमार गौतम आदि का सम्मान हुआ। इसके अलावा कलाकारों को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया।

नाटक में दिखी धर्म की राजनीति
रामलीला मैदान में मुंशी प्रेमचंद की कहानी हिंसा परमो धर्म: का नाट्य मंचन प्रेरणा कला मंच के कलाकारों ने किया। उन्होंने इसकी प्रस्तुति कर धर्म को लेकर हो सत्ता के लिए हो रही राजनीति और आपसी सद्भाव को दर्शाया। सनबीम एकेडमी के विद्यार्थियों ने बूढ़ी काकी की पीड़ा को व्यक्त किया। जबकि सनबीम विमेंस कॉलेज की छात्राओं ने पंच परमेश्वर नाटक का मंचन किया। 

जौनपुर की नाट्य संस्था कामसोमोल ने आहुति, यथार्थ क्रिएशन सोसाइटी के कलाकारों ने बेटी का धन और द लिटिल मून एकेडमी के छात्रों ने मृतक भोज नाटक की प्रस्तुति दी। नवरचना काॅन्वेंट स्कूल और सनवैली पब्लिक स्कूल के बच्चों ने मंत्र नाटक पेश किया। वहीं, बिरहा गायक विष्णु यादव और प्रमोद विश्वकर्मा ने लोक गीतों से मुंशी प्रेमचंद को याद किया। सीमा पटेल ने कजरी प्रस्तुत की।

लमही महोत्सव में नाटक का भावपूर्ण मंचन। - फोटो : अमर उजाला
झाड़ी में पड़े रहे प्रेमचंद की कहानियों के किरदार
लमही गांव में प्रवेशद्वार के पास झाड़ी के रूप में तब्दील हो चुके प्रेमचंद पार्क में मुंशी जी की कहानियों के पात्र की मूर्तियां जीर्णशीर्ण हाल में पड़ी रहीं। 

सुरेशचंद दुबे ने बताया कि दो बैलों की जोड़ी के दो बैल हीरा व मोती और झूरी, पूस की रात के हल्कू, ईदगाह के हामिद व आमिना आदि पात्रों की मूर्तियां प्रवेशद्वार पर लगाई गई थीं लेकिन नाला बनाए जाने से करीब दो माह से हटा दिया गया है। पार्क बंद पड़ा है। वहीं, स्मारक स्थल की खराब बिजली उनकी जयंती पर भी नहीं बनी थी।
विज्ञापन

छायावाद के स्थापित होने के दौर के लेखक रहे हैं प्रेमचंद
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर ‘प्रेमचंद का महत्व’ विषयक विचार गोष्ठी हुई। कार्यक्रम की रूपरेखा गजेंद्रमणि दुबे ने प्रस्तुत की। डॉ. अशोक कुमार ज्योति ने कहा कि प्रेमचंद का महत्व किसी के कहने से स्थापित नहीं होता। प्रेमचंद उस दौर के लेखक हैं, जिस दौर में छायावाद को गाजे-बाजे के साथ स्थापित किया गया।



कथा आलोचक प्रो. नीरज खरे ने कहा कि एक देश के बनने का सपना प्रेमचंद के समय में बना है। आजाद भारत कैसा होगा, ऐसी चिंताएं प्रेमचंद में दिखती हैं। आधुनिक साहित्य में सबसे महत्वपूर्ण लेखक प्रेमचंद हैं। प्रो. मनोज सिंह ने कहा कि संकट जितना गहराएगा, उसका महत्व उतना ज्यादा होगा। 



कवि आलोचक प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ल ने कहा कि ‘प्रेमचंद के फटे जूते’ में हरिशंकर परसाई ने प्रेमचंद का चित्रण करते हुए सामंतवाद की गांठ को ‘सद्गति’ कहानी में तोड़ने का कार्य किया है। प्रो. श्रद्धा सिंह ने कहा कि प्रेमचंद श्रमिक, स्त्री को उसका अधिकार दिलाने की बात करते हैं। 

अध्यक्षता विभागाध्यक्ष प्रो. वशिष्ठ अनूप ने की। इस दौरान शब्द शिल्पी सम्मान से सम्मानित साहित्यकार डॉ. देवी प्रसाद तिवारी ने भी विचार रखे। संचालन शोध छात्र विकास तिवारी ने किया। कार्यक्रम में प्रो. आशीष त्रिपाठी, प्रो. प्रभाकर सिंह, डॉ. महेंद्र प्रसाद कुशवाहा, डॉ. प्रभात कुमार मिश्र, अंबुज यादव आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें