महासमागम में समाज के लोग।
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जिलाध्यक्ष किशोर सेठ ने बताया कि काशी को 30 सेक्टरों में बांटकर बीते चार महीनों से निरंतर जनसंपर्क अभियान चलाया गया, जिसके फलस्वरूप यह ऐतिहासिक समागम साकार हुआ। वक्ताओं ने कहा कि सोनार समाज अब केवल वोट बैंक बनकर नहीं रहेगा। जब राजनीतिक हिस्सेदारी और टिकट वितरण की बारी आती है, तो समाज को हाशिए पर धकेल दिया जाता है। इस उपेक्षा को समाप्त करने के लिए सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि आगामी चुनावों में आबादी के अनुपात में टिकटों की दावेदारी की जाएगी, हर विधानसभा में कोर कमेटियां गठित होंगी और शासन को वृहद स्तर पर मांग पत्र सौंपा जाएगा।
प्रतिनिधियों ने हाल के दिनों में बढ़ी लूट, डकैती और हत्या की घटनाओं पर गहरा रोष जताया। व्यापारियों को भयमुक्त वातावरण देने के साथ ही बीएनएस की धारा 317 (पूर्व में आईपीसी 411/412) के दुरुपयोग पर रोक लगाने की मांग की गई। पूर्वांचल अध्यक्ष ईश्वर दयाल सिंह सेठ ने कहा कि चोरी के माल की बरामदगी के नाम पर निर्दोष और ईमानदार सर्राफा कारोबारियों का पुलिसिया उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इसके लिए सामूहिक विधिक कदम उठाए जाएंगे। पारंपरिक गिरवी कारोबार को सुचारू रूप से चलाने के लिए पुरानी साहूकारी लाइसेंस व्यवस्था को फिर से बहाल करने का प्रस्ताव भी पारित हुआ। महिला प्रकोष्ठ की जिलाध्यक्ष बेबी सेठ ने युवाओं व महिलाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने पर बल दिया। अध्यक्षता कृष्ण नारायण सोनी, संचालन रवि सर्राफ और धन्यवाद ज्ञापन अरुण सोनी ने किया।