40 सामग्री से कर सकते हैं पूजन
सोने, चांदी के सिक्के, बताशा एवं गुड़, इलायची, सुपारी, पान, दुर्वा, पंचपात्र, कच्चा दूध, दही, शुद्ध देशी घी, गंगाजल, गेहूं, कांसे या चांदी की थाली, लाल वस्त्र, सिंदूर, नारियाल, मिष्ठान, ऋतु फल, लाल चन्दन, पुष्पहार, इत्र, गेली, मौली, केशर, कलश, चावल, कपूर, हल्दी, धनिया, तेल, बाती, चीनी के खिलौने आदि शामिल है।
इनकी भी सुनें
वृषभ और सिंह लग्न का मुहूर्त सर्वोत्तम है। दीपदान, लक्ष्मी और काली पूजन के लिए दो काल में 4:10 घंटे का मुहूर्त मिल रहा है।
- प्रो चंद्रमौलि उपाध्याय, ट्रस्टी, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर
दीपावली बृहस्पतिवार को ही मनेगी। देर शाम से देर रात तक के मुहूर्त मिल रहे हैं। मुहूर्त के हिसाब से दीपदान और लक्ष्मी पूजन का संयोग बन रहा है।
- प्रो रामनारायण द्विवेदी, महामंत्री काशी विद्वत परिषद
प्रदोषकाल सूर्यास्त के बाद 48 मिनट तक रहता है। एक नवंबर को प्रदोषकाल व महानिशीकाल में कार्तिक अमावस्या नहीं पड़ रहा है, इसलिए दीपावली गुरुवार को ही है।
- ऋषि द्विवेदी, ज्योतिषाचार्य
ये है मुहूर्त
| गोधूलि बेला |
5:34 बजे से 6:10: बजे तक |
| वृषभ लग्न काल |
शाम 6:28 बजे से 8:24 बजे तक |
| महानिशीथ काल |
|
| लक्ष्मी पूजन |
रात 11:38 बजे से 12:30 बजे तक |
| सिंह लग्न काल |
रात 12:56 बजे से 3:10 बजे तक |
| चौघड़िया |
शाम 4:30 बजे से 6 बजे तक |