एकात्म मानववाद के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 104वीं जन्म जयंती पर शुक्रवार को पड़ाव स्थित स्मृति स्थल पर विविध आयोजन किए गए। स्मृति स्थल पर 104 भाजपा कार्यकर्ताओं ने 104 पौधे लगाए। इसके बाद 60 फीट ऊंची प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित किया।
आयोजित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता प्रदेश सह प्रभारी सुनील ओझा ने कहा कि पं दीनदयाल सादगी की प्रतिमूर्ति एवं प्रामाणिकता की पराकाष्ठा थे। पूंजीवाद और साम्यवाद के बीच कोई तीसरी विचार धारा हो सकती है ये कोई मानने के लिए तैयार नही था। पं दीनदयाल जी का मानना था कि भारत की दृष्टि से पूंजीवाद और साम्यवाद दोनों ही ठीक नही है। उनका मानना था कि संस्कृति भी भारतीय चलेगी और अर्थनीति भी भारतीय चलेगी। जिस अर्थनीति के बारे में दीनदयाल जी 1965 में कहा था उसका 2014 से 2020 के बीच यथार्थ पालन हो रहा है। कृषि पर दबाव कम करने के लिए उद्योग लगाने चाहिए और उत्पाद ऐसा होना चाहिए कि उसका निर्यात किया जा सके। किसानों को स्वतंत्रता होनी चाहिए, मध्यस्थों को हटाया जाना चाहिए ताकि किसानों को मुनाफा हो, उस समय पं दीनदयाल जी द्वारा कही हुई बातों को वर्तमान मोदी सरकार पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
प्रदेश उपाध्यक्ष एवं विधान परिषद सदस्य विजय बहादुर पाठक ने कहा कि एक उत्कृष्ट संगठनकर्ता के रूप में पं दीनदयाल जी ने जो वैकल्पिक राजनीति की नींव रखी वो आज देश के गरीब, वंचित व शोषित वर्ग को विकास की मुख्यधारा में लाने का काम कर रही है। उनका जीवन सामाजिक समरसता व राष्ट्रभक्ति का अनुपम उदाहरण हैं। कार्यक्रम की शुरुआत में वाराणसी महानगर एवं जिला अध्यक्ष विद्या सागर राय, हंसराज विश्वकर्मा एवं चंदौली जिला अध्यक्ष अभिमन्यु सिंह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया।