आजमगढ़। कार्य के प्रति अगर त्याग, समर्पण और कर्तव्य निष्ठा की भावना हो तो संसाधनों की कमी कभी मार्ग का रोड़ा नहीं बनती है। यह साबित कर दिखाया प्राथमिक विद्यालय चक्रपानपुर में तैनात प्रधानाध्यापक व शिक्षकों के समर्पण ने। जिन्होंने कम स्टाफ और सीमित संसाधनों की परवाह किए बिना अपने नवाचारों से बच्चों को तो शिक्षित किया ही, वहीं विद्यालय को भी ऐसा परिवेश दिया कि विद्यालय जिले के उत्कृष्ट विद्यालयों की श्रेणी में शुमार हो गया है। अब कान्वेंट स्कूलों को मात दे रहा है।
विद्यालय में मॉडल पेंटिग, बाल संसद, शैक्षणिक गतिविधियां, कक्षा-कक्ष सज्जा, विद्युतीकरण, हरा-भरा कैंपस है। यहां के बच्चे स्मार्ट क्लास करते हैं। अब विद्यालय में 180 बच्चों का नामांकन है। वर्ष 2016 में विद्यालय की स्थिति एक आम सरकारी विद्यालय की तरह ही थी। बच्चों की अनियमित उपस्थिति, साधारण भौतिक परिवेश, विद्यालय में अनुशासन की कमी आदि कई समस्याएं मौजूद थीं। इसके बाद विद्यालय में प्रधानाध्यापक विनोद सिंह की नियुक्ति हुई। उन्होंने सहायक स्टाफ के साथ मिलकर चार वर्षों में पूरे परिवेश को बदलकर रख दिया।
विद्यालय की स्वच्छता व बच्चों की व्यक्तिगत सफाई पर विशेष ध्यान दिया गया। बच्चों को बेहतर ड्रेस के साथ टाई व बेल्ट भी प्रदान की गई। उनको प्रतिदिन स्वच्छता के साथ विद्यालय आने के लिए प्रेरित किया गया। बदलते परिवेश को देख बच्चों का लगाव विद्यालय से बढ़ने लगा और उनकी दैनिक उपस्थिति में बढ़ोतरी होने लगी। बेहतर ड्रेस में विद्यालय आने में बच्चों को आनंद आने लगा। उनके मानसिक स्तर में भी परिवर्तन देखने को मिला। बच्चों में स्वस्थ प्रतियोगी भावना विकसित हुई जिससे उनके प्रदर्शन में भी निखार आया। विद्यालय में बच्चों के व्यक्तित्व विकास के लिए साप्ताहिक गतिविधियों का भी आयोजन किया जाता है।
सीसीटीवी से हो रही निगरानी
आजमगढ़। प्रधानाध्यापक विनोद सिंह और स्टाफ ऐसे बच्चों की मदद करते हैं जिसका परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है। उनकी पढ़ाई में आने वाली दिक्कतों को दूर करने के साथ ही उनकी कॉपी, पेंसिल एवं अन्य जरूरतों का भार अपने निजी खर्चे से उठाते हैं। वहीं बच्चों व स्कूल की सुरक्षा के मद्देनजर विद्यालय में सीसीटीवी कैमरा लगवाया गया है।
90 फीसदी रहती है उपस्थिति
आजमगढ़। प्रधानाध्यापक विनोद सिंह ने बताया कि जब वह विद्यालय में आए तो अन्य सरकारी स्कूलों की तरह यहां की भी स्थिति थी। उजाड़ पड़े स्कूल में नाम मात्र की संख्या थी। उन्होंने अपने दृढ़ संकल्प से कुछ ही वर्षों में विद्यालय की तस्वीर बदल दी। आज विद्यालय का आकर्षक परिवेश और शिक्षण व्यवस्था कॉन्वेंट स्कूलों को मात दे रही है। नवाचारों से विद्यालय में छात्रों की संख्या भी काफी बढ़ी। पहले विद्यालय में जहां कम बच्चे ही रहते थे वहीं आज 180 छात्र नामांकित हैं। उन्होंने बताया कि इन छात्रों की उपस्थिति भी 90 फीसदी तक रहती है। इसमें सहायक अध्यापक ममता, संजू सिंह यादव, शिक्षा मित्र शिव प्रसाद पांडेय व बेबी सिंह का भरपूर सहयोग रहा। जिनकी मदद से आज विद्यालय को इस मुकाम पर लगाए हैं।