सन 1851 में रानी लक्ष्मीबाई ने एक पुत्र को जन्म दिया जिसकी मात्र चार महीने की आयु में ही मृत्यु हो गई। इसके बाद राजा की गंभीर अवस्था को देखते हुए रानी लक्ष्मीबाई ने एक दत्तक पुत्र गोद ले लिया। परंतु इसको ब्रिटिश सरकार ने नकारते हुए झांसी को ब्रिटिश राज्य में मिलाने की घोषणा की। इस घोषणा से आहत रानी लक्ष्मीबाई ने सन 1857 में विद्रोह कर दिया और तात्या टोपे की सेना के साथ मिलकर ब्रिटिश सेना से मुकाबला किया। ग्वालियर के पास ब्रिटिश सेना से लड़ते हुए रानी लक्ष्मीबाई मातृभूमि की आजादी के लिए शहीद हो गईं।