नियाज अहमद ने बताया कि साफिया जलील हस्ताक्षर करती थीं। मगर, उन्हें गारंटर बनाकर 2004 में जारी कराई गई सीसी लिमिट से संबंधित बैंक के कागजात में हर जगह उनका अंगूठा लगा है। यही नहीं, वर्ष 2006 में सीसी लिमिट का नवीनीकरण किया गया तो साफिया जलील का रि-वेरिफिकेशन कर उन्हें जिंदा ही बताया गया।
हाईकोर्ट ने कहा हमें सुना जाए, पुलिस बोली, कार्रवाई करेंगे
नियाज अहमद ने बताया कि बैंक स्तर पर सुनवाई नहीं हुई तो डीआरटी, इलाहाबाद के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट गए। हाईकोर्ट को बताया गया कि जानकारी के बगैर ही मृत हो चुकी साफिया को सीसी लिमिट का गारंटर बनाकर मकान गिरवी रख दिया गया। फिर, लोन रिकवरी का मुकदमा भी जीत लिया गया। इस पर हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि हमारी भी बात सुनी जाए। उधर, पुलिस ने भी कहा है कि तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
सीसी लिमिट स्वीकृत कराने वाले की भी हो गई मौत
प्रतिनिधि के मुताबिक साफिया को गारंटर बनाकर जिस व्यक्ति ने बैंक से सीसी लिमिट स्वीकृत कराई थी, 28 अप्रैल 2021 को उसकी भी मौत हो गई। जिस महिला को साफिया बताते हुए सीसी लिमिट का गारंटर बनाया गया और तस्वीर इस्तेमाल की गई, उसका भी आज तक कहीं पता नहीं है। ऐसे में यह सुनियोजित तरीके से मकान हड़पने की बड़ी साजिश लगती है।