परिषदीय प्राथमिक विद्यालय, उच्च प्राथमिक विद्यालय, अशासकीय सहायता प्राप्त प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में स्कूल यूनिफार्म, जूते-मोजे, स्वेटर व स्कूल बैग के लिए कक्षा एक से आठ तक के बच्चों के अभिभावकों के खाते में भेजी जाने वाली धनराशि के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। दो लाख 44 हजार 687 नामांकन में से 21,245 संदिग्ध पाए गए हैं। इन अभिभावकों के खाते में धनराशि भेजने पर राज्य परियोजना निदेशालय ने रोक लगा दी है। सत्यापन के बाद ही इनके खातों में धनराशि भेजी जा सकेगी। वहीं, डीबीटी प्रक्रिया में नॉन सीडेड खाते भी सिरदर्द बने हुए हैं। जिले के कुल 32,077 खाते नॉन सीडेड (आधार से लिंक नहीं और निष्क्रिय) पाए गए हैं। नॉन सीडेड खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर नहीं हो पा रहा है।
इस तरह के मामले आए
काशी विद्यापीठ ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय में कक्षा एक की छात्रा का नामांकन चंदौली जिले में कक्षा दो में मिला है। वहीं, प्राथमिक विद्यालय भरथरा में पढ़ने वाली छात्रा प्राथमिक विद्यालय भिटी में भी नामांकित है। किसी विद्यालय में दो जुड़वा बच्चों का नामांकन एक विद्यालय में हुआ है तो ऐसे बच्चों का डाटा भी पोर्टल ने संदिग्ध की श्रेणी में रखा है। प्रधानाध्यापक के सत्यापन के बाद बच्चों का डाटा अपडेट किया जाएगा।
डीबीटी में संदिग्ध डाटा की जांच कराई जाएगी। किसी भी अपात्र व दो विद्यालय से नामांकन कराने वाले विद्यार्थियों को डीबीटी का लाभ नहीं मिल सकेगा।
- राकेश सिंह, बीएसए