माता श्रृंगार गौरी की आराधना में भक्त रहे लीन।
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महिलाएं हाथों में पूजन और श्रृंगार सामग्री लिए चैती और पचरा गीतों का सामूहिक गायन कर रही थीं, जिससे पूरे मार्ग में धार्मिक उत्साह का माहौल बना रहा। परंपरागत लोकगीतों और भक्ति संगीत ने आयोजन को और भी भव्य बना दिया।
प्रशासन की ओर से सुरक्षा और व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए थे। जिला प्रशासन और मंदिर प्रशासन की टीम लगातार निगरानी में जुटी रही। सुरक्षा की दृष्टि से भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था, जिससे कहीं भी अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न नहीं हुई। श्रद्धालुओं के आवागमन को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष रूट प्लान भी लागू किया गया था।
पूरे आयोजन के दौरान कहीं से किसी प्रकार की अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली। श्रद्धालुओं ने भी प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए शांतिपूर्ण तरीके से दर्शन किए। प्रशासनिक व्यवस्थाएं इतनी सुव्यवस्थित रहीं कि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता श्रृंगार गौरी के दर्शन से सुख-समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि हर वर्ष इस विशेष अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु काशी पहुंचते हैं।